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तीरंदाजी में जीत चुकी गोल्ड मेडल, अब घर चलाने के लिए बेच रही झालमुड़ी

  • Edited By Bhawna sharma,
  • Updated: 04 Mar, 2021 01:03 PM
तीरंदाजी में जीत चुकी गोल्ड मेडल, अब घर चलाने के लिए बेच रही झालमुड़ी

आए दिन खबरों में देखते हैं कि कभी देश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ी आज आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। वे अपना पेट पालने के लिए मश्कत कर रहे हैं। ऐसा ही हाल तीरंदाजी में गोल्ड मेडल जीतने वाली ममता टुडु का है। परिवार की आर्थिक हालत ठीक ना होने के कारण ममता को झालमुड़ी बेच कर अपना गुजारा करना पड़ रहा है और यह सब कोरोना वायरस के कारण लगे लाॅकडाउन के दौरान हुआ। 

‘गोल्डन गर्ल’ ममता 

एक वेबसाइट के मुताबिक, धनबाद के तेलीपाड़ा की रहने वाली ममता ने 13 साल की उम्र में अंडर-13 तीरंदाजी में अपना हुनर दिखा गोल्ड मेडल अपने नाम कर राज्य का सीना गर्व से चौड़ा किया। ममता Center of Excellence for archery में तीरंदाजी की ट्रेनिंग ले रही थी। ममता को धनबाद में ‘गोल्डन गर्ल’ के नाम से भी जाना जाता है। 

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लाॅकडाउन के बाद नहीं गई वापिस 

कोरोना महामारी के कारण लगे लाॅकडाउन में ममता घर आ गई थी। मगर बाद में वह वापिस नहीं जा पाई जिसकी वजह आर्थिक तंगी है। 

किसी ने नहीं की मदद- ममता 

तीरंदाजी छोड़ आज ममता अपने परिवार का ध्यान रख रही है। घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ने की चलते वह झालमुड़ी बेच कर हर रोज 100-200 रुपये की कमाई करती है और अपना घर चलाती हैं। ममता का कहना है कि वह अंडर-13 तीरंदाजी में गोल्ड मेडल जीतने के अलावा नेशनल चैम्पियनशिप में भी फर्स्ट आई है। वह आगे और खेलना चाहती थी लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की।

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निशाना कभी नहीं चूकता 

ममता की मां का कहना है कि उसका निशाना कभी गलत नहीं जाता। उसने कई मेडल जीते हैं। वहीं धनबाद आर्चरी एसोसिएशन की तरफ से कहा गया है कि वे ममता को मदद देने की पूरी कोशिश करेंगे। 

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