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गांधी परिवार की बहू से कांग्रेस अध्यक्ष तक का सफर, जानिए सोनिया के जीवन से जुड़ी खास बातें

  • Edited By khushboo aggarwal,
  • Updated: 09 Dec, 2019 05:07 PM
गांधी परिवार की बहू से कांग्रेस अध्यक्ष तक का सफर, जानिए सोनिया के जीवन से जुड़ी खास बातें

गांधी परिवार की बहू सोनिया गांधी पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ही नहीं दुनिया की सबसे ज्यादा ताकतवर महिलाओं की लिस्ट में भी शामिल है। फोर्ब्स की लिस्ट के अनुसार सोनिया गांधी दुनिया की 100 सबसे ज्यादा इंफ्लूएंशियल महिलाओं की सूची में शामिल है। सोनिया गांधी आज 73 साल की हो गई है लेकिन जानकारी के अनुसार देश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ रहे अत्याचारों का विरोध करते हुए आज वह अपना जन्मदिन सेलिब्रेट नहीं करेगी। 

 

राजनीति में एक मजबूत महिला के साथ सोनिया गांधी का नाम भारत में तब लिया गया था जब लव मैरिज बहुत बड़ी बात थी और देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का बेटा एक विदेशी बहू ले आए थे। जो कि देश के कई लोगों को नागवार गुजरा था। आज आपको सोनिया गांधी की लव स्टोरी के साथ उनके इस सफर की कुछ बाते बताते हैं। राजीव गांधी और सोनिया गांधी की शादी 23 साल चली और उसके बाद राजीव गांधी के अंत से इस प्रेम कहानी का दुखद अंजाम हुआ लेकिन इसके बाद सोनिया गांधी राजनीति में एक मजबूत महिला के तौर पर उबर कर सबके सामने आई और पार्टी को संभाला।

 

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लंदन में पढ़ाई के दौरान राजीव गांधी अक्सर अपने दोस्तों के साथ बाहर जाया करते थे। उसी दौरान एक शाम राजीव गांधी  दोस्तों के साथ लंदन के वरसिटी रेस्त्रां में बैठे थे और वहीं उन्होंने सोनिया माइनो (Sonia Maino) यानि की सोनिया गांधी को देखा।  राजीव गांधी को सोनिया गांधी से उसी समय प्यार हो गया। उस समय सोनिया कैम्ब्रिज में पढ़ रही थीं और साथ ही साथ पार्ट-टाइम वेट्रेस की तरह उसी होटल में काम कर रही थीं। सोनिया गांधी के नजदीक रहने के लिए राजीव गांधी ने अपने दोस्त और रेस्त्र के मालिक चार्ल्स एंटोनी को रिश्वत दी। इसके उन्होंने पेपर नैपकिन पर एक कविता और बेस्ट वाइन सोनिया के लिए भेजी। इसके बाद उनकी मुलाकात शुरु हुई।

 

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राजीव ने जब अपनी मां इंदिरा गांधी को इस बारे में बताया तो वह सोनिया से मिलने लंदन पहुंच गई। राजीव के परिवार की ओर से रिश्ते के लिए हां थी लेकिन सोनिया के पिता इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं थे। इसलिए राजीव गांधी 1967 में भारत वापस आए और उन्होंने 1968 को सोनिया गांधी को भी भारत बुला लिया गया। तब सोनिया तेजी बच्चन के घर रही। वहीं हरिवंश राय बच्चन ने ही राजीव के पिता की भूमिका निभाई और दोनों की शादी 25 फरवरी 1968 को हो गई। 1970 जून में राहुल गांधी का जन्म हुआ और 1972 जनवरी में प्रियंका गांधी का।

 

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राजीव गांधी कभी राजनीति में नहीं आना चाहते थे। सोनिया गांधी के परिवार ने यही शर्त भी रखी थी लेकिन पारिवारिक मजबूरियों के चलते उन्हें आना पड़ा। उसके बाद 21 मई 1991 को बम धमाके में राजीव गांधी की मौत के बाद सोनिया गांधी पर पार्टी में पद को संभालने पर काफी प्रेशर बन रहा था। उस समय उनके पास दो ही ऑप्शन थे या तो वह बच्चों के साथ वापिस चली जाएं या पार्टी को संभाल लें।

1998 में पार्टी की ओर से सोनिया गांधी को कमान संभालने के लिए कहा गया क्योंकि 1996, 98  में पार्टी का प्रदर्शन काफी खराब रहा था। तब सोनिया गांधी ने अपनी बात को भूलते हुए राजनीति के सफर में कदम रखा था। तब 14 मार्च 1998 में सोनिया गांधी को कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष के पद पर चुना गया था। इसके बाद लगातार 19 साल तक वह इस पद पर काम करती रही। सोनिया 1999 में अमेठी सीट से पहली बार लोकसभा पहुंची थीं, मगर 2004 में उन्होंने अमेठी सीट अपने पुत्र राहुल गांधी के लिए छोडक़र रायबरेली से चुनाव लड़ा था।

 

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2004 में पार्टी आने से पहले सोनिया गांधी ने कांग्रेस के साथ- साथ जनता की नजरों में अपनी जगह को काफी मजबूत कर लिया था। उसके बाद वह पूरे जोश के साथ 2004 में कमबैक करते हुए कांग्रेस सत्ता में वापिस आई। सोनिया गांधी को अध्यक्ष बनाने के बाद पहली बार कांग्रेस चारों राज्यों में सिमटी हुई थी। इतना ही नहीं, मध्यप्रदेश, ओडिशा, नागालैंड व मिजोरम लोकसभा में कांग्रेस के 141 सांसद थे। 
 

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