नारी डेस्क : कैंसर आज दुनियाभर में मौत की दूसरी सबसे बड़ी वजह बन चुका है। यह बीमारी तब होती है जब शरीर की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर के रूप में शरीर के अलग-अलग हिस्सों में फैल जाती हैं। अलग-अलग तरह के कैंसर के कारण अलग हो सकते हैं, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार हमारी गलत जीवनशैली, खानपान और कुछ आदतें कैंसर के खतरे को कई गुना बढ़ा देती हैं।
कैंसर क्या है और क्यों होता है?
कैंसर (Cancer) एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की खराब कोशिकाएं तेजी से बढ़ने लगती हैं और अच्छी कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं। समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी शरीर के दूसरे अंगों तक फैल सकती है। सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉक्टर बताया है कि रोजमर्रा की जिंदगी में की जाने वाली कुछ गलतियां कैंसर का कारण बन सकती हैं।

डॉक्टर के अनुसार कैंसर की 10 बड़ी वजहें
गलत खानपान
आजकल की जीवनशैली में प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड, तले-भुने और पैकेटबंद खाद्य पदार्थों का ज्यादा सेवन कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है। इन चीजों में मौजूद हानिकारक केमिकल्स, प्रिज़र्वेटिव्स, ट्रांस फैट और ज्यादा नमक-चीनी शरीर में सूजन बढ़ाते हैं और कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। लंबे समय तक ऐसा भोजन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, जिससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का जोखिम बढ़ सकता है।
धूम्रपान
सिगरेट, बीड़ी, हुक्का या किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन कैंसर की सबसे बड़ी और गंभीर वजहों में से एक माना जाता है। तंबाकू में मौजूद हानिकारक रसायन फेफड़ों, मुंह, गले और जीभ की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। लंबे समय तक धूम्रपान करने से कोशिकाओं में असामान्य बदलाव होने लगते हैं, जिससे कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
शराब का सेवन
नियमित और अधिक मात्रा में शराब पीना कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है। शराब शरीर में जाकर हानिकारक तत्वों में बदल जाती है, जो लिवर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है और समय के साथ लिवर कैंसर का कारण बन सकती है। इसके अलावा शराब का अधिक सेवन मुंह, गले और ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को भी बढ़ाता है, क्योंकि यह शरीर की इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देती है और कोशिकाओं के सामान्य कामकाज को प्रभावित करती है।
हार्मफुल केमिकल्स के संपर्क में आना
कीटनाशक, पेंट, इंडस्ट्रियल केमिकल्स और बढ़ता वायु प्रदूषण शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकते हैं। इनमें मौजूद जहरीले तत्व लंबे समय तक शरीर में प्रवेश करने पर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और उनमें असामान्य बदलाव पैदा कर सकते हैं। लगातार ऐसे हानिकारक केमिकल्स के संपर्क में रहने से कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है, खासकर फेफड़ों, त्वचा और ब्लड कैंसर का जोखिम ज्यादा होता है।

शारीरिक गतिविधि की कमी
रोजाना एक्सरसाइज न करना और लंबे समय तक बैठे रहना शरीर के मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देता है। इससे वजन बढ़ता है और शरीर में सूजन की समस्या होने लगती है, जो कैंसर के खतरे को बढ़ा सकती है। शारीरिक गतिविधि की कमी से इम्यून सिस्टम भी कमजोर पड़ता है, जिससे शरीर कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ने में कम सक्षम हो जाता है।
मोटापा
ज्यादा वजन या मोटापा कैंसर के कई प्रकारों के खतरे को बढ़ा सकता है। शरीर में अतिरिक्त चर्बी हार्मोनल असंतुलन पैदा करती है और सूजन को बढ़ावा देती है, जिससे कोशिकाओं के असामान्य रूप से बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है। मोटापे के कारण खासतौर पर ब्रेस्ट, कोलन और किडनी कैंसर का जोखिम अधिक देखा जाता है।
लंबे समय तक तनाव
लगातार तनाव में रहना और पूरी नींद न लेना शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है। स्ट्रेस के कारण शरीर में हार्मोनल असंतुलन होता है, जिससे कोशिकाओं की मरम्मत की प्रक्रिया प्रभावित होती है। लंबे समय तक तनाव बने रहने से शरीर बीमारियों से लड़ने में कमजोर पड़ जाता है और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ सकता है।
वायरल इंफेक्शन
कुछ वायरल संक्रमण लंबे समय तक शरीर में बने रहने पर कैंसर का कारण बन सकते हैं। जैसे HPV (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) सर्वाइकल कैंसर से जुड़ा होता है, जबकि हेपेटाइटिस बी और सी वायरस लिवर कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं। ये वायरस शरीर की कोशिकाओं में बदलाव पैदा करते हैं और इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देते हैं, जिससे कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है।
धूप में ज्यादा रहना
लंबे समय तक तेज धूप के संपर्क में रहना त्वचा के लिए नुकसानदायक हो सकता है। सूरज की पराबैंगनी (UV) किरणें त्वचा की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं और उनमें असामान्य बदलाव पैदा कर सकती हैं। लगातार बिना सुरक्षा के धूप में रहने से स्किन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए बाहर निकलते समय त्वचा की सुरक्षा करना बेहद जरूरी है।

उम्र और जेनेटिक फैक्टर
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर की कोशिकाओं की मरम्मत करने की क्षमता कम होने लगती है, जिससे कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। खासतौर पर 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों में कैंसर होने की संभावना ज्यादा होती है। इसके अलावा अगर परिवार में पहले किसी को कैंसर रह चुका है, तो जेनेटिक कारणों से अगली पीढ़ी में भी इसका जोखिम बढ़ सकता है।
कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हो सकते हैं?
डॉक्टरों के अनुसार इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
लगातार थकान महसूस होना
शरीर के किसी हिस्से में गांठ बनना
त्वचा के रंग में बदलाव (पीला या लाल होना)
मलत्याग या पेशाब की आदतों में बदलाव
अचानक नया तिल या मस्सा उभरना
आवाज में बदलाव या भारीपन
बिना वजह चोट लगना या खून आना।
कैंसर से बचाव के लिए क्या करें?
संतुलित और पौष्टिक आहार लें
धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं
रोजाना एक्सरसाइज करें
तनाव कम करें और पूरी नींद लें
नियमित हेल्थ चेकअप कराएं।