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वीरता सम्मानः युद्ध सेवा मेडल पाने वाली पहली महिला मिंटी अग्रवाल

  • Edited By khushboo aggarwal,
  • Updated: 17 Aug, 2019 12:19 PM
वीरता सम्मानः युद्ध सेवा मेडल पाने वाली पहली महिला मिंटी अग्रवाल

15 अगस्त के दिन लाल किले में प्रधानमंत्री द्वारा देश के लिए शहीद होने वाले वीरों को याद कर नमन किया जाता है, साथ ही देश के लिए काम करने वाले लोगों की देशभक्ति के लिए सम्मानित किया गया। जिनमें पुलवामा हमले का जवाब देने वाले जाबांज पायलटो को वीरता पदक दिया गया। इसी में भारती सेना से आईएएफ की स्कावड्रन लीडर मिंटी अग्रवाल भी थी। मिंटी वह पहली महिला है जिन्हें भारत सरकार की ओर से युद्ध सेवा मेडल मिला है। उन्होंने एयर स्ट्राइक में उड़ान नियंत्रक की भूमिका निभाई थी। 

 

क्या है युद्ध सेवा मेडल 

युद्ध सेवा मेडल देने की शुरुआत 26 जून 1980 में की गई थी। यह मेडल युद्ध, संघर्ष व विषम परिस्थितियों में असाधारण बहादुरी दिखाने के लिए दिया जाता है। 35 सेंटीमीटर व्यास वाला यह मेडल सोने का बना होता है। सोने के रंग वाली पट्टी में पाए जाने वाले मेडल की एक तरफ सितारे की आकृति व दूसरी तरफ भारत सरकार के राष्ट्रीय चिन्ह के साथ हिंदी व अंग्रेजी में  'युद्ध सेवा मेडल' लिखा होता है। यह वीरता पुरस्कार से पुरी तरह से अलग होता है। 

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मिंटी ने अदा किया था यह रोल 

जब अभिनंदन ने बालाकोट सर्जिकल स्ट्रा्इक के बाद भारत की सीमा में घुस रहे पाकिस्तानी एफ 16 फाइटर विमान को मार गिराया था, तब मिंटी अग्रवाल विंग कमांडर अभिनंदन के ऑपरेशन के समय रडार कंट्रोलिंग सिस्टम को हैंडल कर रही थी। जब मिंटी अग्रवाल को पता लगा कि पाकिस्तानी विमान भारत की तरफ आर है तो उन्होंने श्रीनगर में वायुसेना के बेस में यह सूचना पहुंचा दी थी। इसके बाद अभिनंदन की पूरी टीम अलर्ट हो गई थी। इतना ही नही जब अभिनंदन एलओसी पार कर रहे थे मिंटी ने उन्हें वापिस आने के लिए कहा था लेकिन उस समय कम्यूनिकेशन जैम था। अभिनंदर के एयरक्राफ्ट में एंटी जैमिंग टेक्निक न होने के कारण उन तक यह सूचना नही पहुंच पाई थी।

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