नारी डेस्क : सर्दियों में घने कोहरे और कड़ाके की ठंड से बचने के लिए लोग अक्सर अंगीठी, बॉनफायर या लकड़ी की आग तापते नजर आते हैं। सड़क किनारे, घर के बाहर या कई बार बंद कमरों में आग सेंकना भले ही सुकून देता हो, लेकिन यह आदत आपकी सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। खासतौर पर तब, जब आप आग के बहुत पास बैठते हैं या बंद जगह में धुएं के संपर्क में लंबे समय तक रहते हैं। दरअसल, आग से निकलने वाले धुएं में कई जहरीले तत्व मौजूद होते हैं, जो शरीर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाते हैं।
आग के धुएं में छुपा है सेहत का बड़ा खतरा
लकड़ी, कोयला या अंगीठी जलाने से निकलने वाले धुएं में ये हानिकारक तत्व पाए जाते हैं।
पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5 जैसे सूक्ष्म कण)
कार्बन मोनोऑक्साइड (CO)
अन्य जहरीली गैसें और कार्बनिक यौगिक
ये तत्व हवा की गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित करते हैं और लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

सर्दियों में आग तापने से होने वाले बड़े नुकसान
हवा जहरीली, सेहत बीमार
लकड़ी जलाने से निकलने वाला धुआं इनडोर और आसपास की हवा को जहरीला बना देता है। लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से शरीर पर गंभीर असर पड़ सकता है। इस धुएं में मौजूद सूक्ष्म कण और हानिकारक गैसें फेफड़ों और हृदय को नुकसान पहुंचाती हैं। ऐसे संपर्क से अस्थमा और ब्रोंकाइटिस जैसी श्वसन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसके अलावा, हृदय रोग और फेफड़ों के कैंसर का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। इसलिए, आग सेंकते समय हमेशा सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।
सांस की गंभीर समस्याएं
आग का धुआं श्वसन तंत्र में सूजन और जलन पैदा करता है, जिससे श्वसन प्रणाली प्रभावित होती है। इसके परिणामस्वरूप लगातार खांसी, घरघराहट और सांस लेने में कठिनाई जैसी परेशानियां हो सकती हैं। ऐसे हालात अस्थमा या सीओपीडी (COPD) से पीड़ित लोगों के लिए और भी खतरनाक साबित हो सकते हैं और कभी-कभी यह जीवन के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
कार्बन मोनोऑक्साइड टॉक्सिटी का जोखिम
लकड़ी या कोयला जलने से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बेहद खतरनाक होती है क्योंकि यह रंगहीन और गंधहीन होती है। बिना चेतावनी के शरीर में प्रवेश कर जाती है। इसके लक्षणों में सिरदर्द, चक्कर, मतली और सांस लेने में दिक्कत शामिल हैं। गंभीर मामलों में यह मस्तिष्क क्षति या मौत तक का कारण बन सकती है, खासकर बंद कमरे में अंगीठी जलाने पर।

आंखों और त्वचा को नुकसान
आग से निकलने वाला धुआं आंखों, नाक और गले को नुकसान पहुंचाता है। लंबे समय तक संपर्क में रहने से आंखों में जलन, लालपन और पानी आना, खुजली और ड्राईनेस त्वचा में सूजन और जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
दिल पर बढ़ता है खतरा
धुएं में मौजूद जहरीले कण सांस के जरिए शरीर में पहुंचकर हृदय पर दबाव डालते हैं। इससे अनियमित दिल की धड़कन, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा 70 प्रतिशत तक बढ़ सकता है, खासकर उन लोगों में जो पहले से हाई बीपी, डायबिटीज या हृदय रोग से पीड़ित हैं।
आग सेंकते समय बरतें ये जरूरी सावधानियां
धुएं से दूरी बनाएं
हवा की दिशा में बैठें
आग से कम से कम 3–5 फीट दूर रहें।
बंद कमरे में आग न जलाएं
कमरे में अंगीठी या कोयला जलाने से बचें
खिड़की-दरवाजे खुले रखें

आग हमेशा खुली जगह पर ही जलाएं
सही ईंधन का इस्तेमाल करें
सूखी और साफ लकड़ी जलाएं
प्लास्टिक, रबर या गीली लकड़ी न जलाएं
समय सीमित रखें
लंबे समय तक आग के पास न बैठें
बीच-बीच में ताजी हवा लें
बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें
बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को धुएं से दूर रखें।
सांस की परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
आग सेंकना सर्दियों में भले ही आरामदायक लगे, लेकिन यह आपकी सेहत को चुपचाप नुकसान पहुंचा सकता है। थोड़ी सी सावधानी और सही आदतें अपनाकर आप ठंड से भी बच सकते हैं और गंभीर बीमारियों से भी।