महिलाओं को लगता है कि बच्चेदानी (यूट्रस) ही उनकी पीरियड्स और प्रेग्नेंसी में होने वाली समस्याओं का कारण है। इसके चलते कुछ महिलाएं यूट्रस निकलवाने के बारे में सोचती है लेकिन बता दें कि इससे आपको दिमाग पर बुरा असर पड़ सकता है। जी हां, शोध के अनुसार, यूट्रस निकलवाने से महिलाओं में डिमेंशिया यानी भूलने की बीमारी का खतरा कई गुणा बढ़ जाता है।
दिमाग पर पड़ता है बुरा असर
स्टडी कहती है कि जैसे ही महिलाएं यूट्रस हटाने की सर्जरी कराती हैं उनमें अर्ली मेनोपॉज आ जाते हैं। यही कारण है कि सर्जरी के बाद महिलाएं धीरे-धीरे चीजें भूलने लगती हैं। इसे ब्रेन फॉग भी कहते हैं, जो यूट्रस से निकलने वाले हॉर्मोन्स की वजह से होता है। बच्चादानी हटाते ही महिलाओं को शॉर्ट-टर्म मैमोरी की समस्या हो जाती है और समझ पर भी असर पड़ता है।

पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में डिमेंशिया की बीमारी ज्यादा होती है। पुरुषों में डिमेंशिया का खतरा 39% और महिलाओं में 61% होता है, जिसका एक कारण बच्चादानी निकलवाना भी है। वहीं भारतीय महिलाओं पर भी इसका खतरा मंडरा रहा है क्योंकि यहां हिस्टेरेक्टॉमी यानी बच्चेदानी हटाने के ऑपरेशन की प्रतिशत दर तेजी से बढ़ी है।
भारत में है खतरा
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार, भारत में यूट्रस निकलवाने वाली महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है, जिनमें 15 से 49 साल की उम्र की महिलाएं शामिल है। सिस्ट, यूट्रस के कैंसर, ब्लीडिंग या किसी इंफैक्शन के कारण डॉक्टर यूट्रस निकलवाने की सलाह देते हैं लेकिन महिलाओं की उम्र औसतन 34 साल होनी चाहिए। हालांकि इस बात को नजरअंदाज करते हुए महिलाएं यूट्रस सर्जरी करवा रही हैं, जिससे उनमें बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।

यूट्रस निकलवाने के अन्य नुकसान
कैंसर का खतरा
लैप्रोस्कोपी हिस्टेरेक्टोमी में पॉवर मोसेलेटर्स के जरिए यूट्रेस टिश्यूज को तोड़ा जाता है, ताकि लैप्रोस्कोपिक चीरे से यूट्रेस को बाहर निकाला जा सके। इस प्रक्रिया के दौरान कैंसर जनित टिश्यूज पूरे शरीर में फैल सकते हैं, जो कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं।
आसानी से नहीं जाते दाग
बच्चादानी निकलवाने के बाद रिकवरी में काफी समय लग जाता है। साथ ही सर्जरी के दौरान शरीर पर लंबा कट लगाया जाता है, जिसके दाग आसानी से नहीं जाते। कई बार तो यह निशान सालों-साल ऐसे ही रहते हैं।
वैजाइना को नुकसान
यूट्रस निकलवाने से वैजाइना को भी नुकसान पहुंचता है। जी हां, अगर सर्जन सर्जरी ध्यान से न करें तो इसके कारण वैजाइना को नुकसान पहुंचता है। ऐसे में बेहतर होगा कि आप सोच-समझकर ही यह फैसला लें।

एनीमिया का खतरा
इस दौरान महिलाओं के शरीर से बहुत खून निकाला जाता है, जिसे वो जल्दी रिकवर नहीं पाती। इसके कारण उन्हें एनीमिया की शिकायत हो जाती है। इतना ही नहीं, कई बार इससे महिलाओं में ब्लड क्लॉटिंग भी हो जाती है, जिससे दिल और फेफड़ों को नुकसान पहुंचता है।
समय से पहले मेनोपॉज
बच्चादानी निकलवाने से महिलाओं को अर्ली मेनोपॉज की समस्या हो जाती है, जिससे दिमाग पर बुरा असर पड़ता है। साथ ही इससे स्वभाव में चिड़चिड़ापन और मानसिक विकार का खतरा भी बढ़ जाता है।
आस-पास के अंगों में चोट
इससे कई बार यूट्रस के आस-पास के अंग जैसे फैलोपियन ट्यूब, आंतें, पेल्विक हड्डियां और ओवरी को चोट लग सकती है। इस चोट के कारण टिटनेस या इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है।
एनेस्थीसिया से दिक्कत
सर्जरी के दौरान होने वाले दर्द से बचने के लिए डॉक्टर मरीज को एनेस्थीसिया देते हैं। इसके कारण महिलाओं को सांस लेने में दिक्कत और दिल से संबंदित समस्या हो सकती है।