नारी डेस्क: पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) और पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज (PCOD) आज के समय में महिलाओं में सबसे आम हार्मोनल डिसऑर्डर बन चुके हैं। अक्सर युवा महिलाओं को इसका पता देर से चलता है, जिससे यह उनकी फिजिकल और मेंटल हेल्थ दोनों पर गंभीर असर डालता है। डॉ. आस्था दयाल के अनुसार, यह डिसऑर्डर न सिर्फ महिलाओं को कंसीव करने में मुश्किल पैदा करता है, बल्कि मोटापा, एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याओं का कारण भी बन सकता है।
PCOS और PCOD क्या हैं?
PCOD – यह आमतौर पर ओवेरियन फंक्शन से जुड़ा हार्मोनल डिसऑर्डर है।
PCOS – यह एक मेटाबोलिक सिंड्रोम है, जिसमें हार्मोनल इम्बैलेंस के साथ कई शारीरिक समस्याएं भी होती हैं।
दोनों डिसऑर्डर ओवरी के सामान्य फंक्शन को प्रभावित करते हैं, जिससे इर्रेगुलर पीरियड्स, एंड्रोजन हार्मोन में बढ़ोतरी और ओवरी में सिस्ट जैसी समस्याएं होती हैं। PCOS अधिक गंभीर होता है और यदि इसे समय पर मैनेज न किया जाए तो पूरी सेहत पर असर दिख सकता है।

PCOS और PCOD के लक्षण
इर्रेगुलर पीरियड्स या पीरियड्स न होना
चेहरे और शरीर पर बालों की अधिक वृद्धि (हिर्सुटिज्म)
मुंहासे
वेट बढ़ना
स्कैल्प हेयर का पतला होना
कंसीव करने में मुश्किल
इन लक्षणों को देखकर समय पर डॉक्टर से परामर्श लेना बहुत जरूरी है। डॉक्टर हार्मोन लेवल, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और पेल्विक अल्ट्रासाउंड टेस्ट की सलाह देते हैं।
PCOS और PCOD का शारीरिक असर
हार्मोनल इम्बैलेंस से ओव्यूलेशन में समस्या, कंसीव करने में कठिनाई, मोटापा और इंसुलिन रेजिस्टेंस टाइप 2 डायबिटीज़ और हाई कोलेस्ट्रॉल लंबे समय तक रहने पर दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा।
मेंटल हेल्थ पर असर
PCOS और PCOD मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डालते हैं। हार्मोनल इम्बैलेंस, बॉडी इमेज इशू और मानसिक स्ट्रेस से महिलाएं एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं से जूझ सकती हैं। स्टडीज़ के अनुसार, PCOD से प्रभावित महिलाओं में लगभग 40% एंग्जायटी और 30% डिप्रेशन से ग्रस्त होती हैं।
बढ़ते मामलों की वजह
मेट्रोपॉलिटन शहरों में युवा महिलाओं में PCOS और PCOD तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके मुख्य कारण हैं
स्ट्रेसफुल और लंबी वर्क शिफ्ट
कम फिजिकल एक्टिविटी और सैंडेंट्री लाइफस्टाइल अनहेल्दी डाइट जिसमें प्रोसेस्ड और फास्ट फूड अधिक होता है। हार्मोनल बैलेंस में गड़बड़ी और इंसुलिन रेजिस्टेंस।
कैसे मैनेज करें PCOS और PCOD?
फिजिकल एक्टिविटी: रोजाना 30 मिनट की मिड-लेवल एक्सरसाइज जैसे ब्रिस्क वॉकिंग, योग, पिलाटीज या वेट लिफ्टिंग करें।

हेल्दी और बैलेंस्ड डाइट: फल, सब्जियां और हेल्दी फैट्स शामिल करें।
स्ट्रेस मैनेजमेंट: पर्याप्त नींद लें, माइंडफुलनेस और रिलैक्सेशन टेक्निक्स अपनाएं।
हेल्दी बॉडी वेट: सही वजन बनाए रखना हार्मोनल बैलेंस और पीरियड साइकिल के लिए जरूरी है।
समय-समय पर मेडिकल चेकअप: हार्मोनल समस्याओं के जल्द निदान और इलाज में मदद करता है।
PCOS और PCOD केवल हार्मोनल समस्या नहीं हैं, बल्कि यह महिलाओं की रिप्रोडक्टिव, फिजिकल और मेंटल हेल्थ को भी प्रभावित करती हैं। समय पर जागरूकता, सही लाइफस्टाइल और मेडिकल ट्रीटमेंट से इसे मैनेज किया जा सकता है।