
नारी डेस्कः एक बार मरीज लकवाग्रस्त हो जाए तो उसका ठीक होना बहुत मुश्किल हो जाता है। प्रभावित अंगों में पहले जैसे जान डालने में बहुत दिक्कत आती है लेकिन अब लकवाग्रस्त पेशेंट को फिर से खड़ा करना आसान हो जाएगा। जी हां, जापान के वैज्ञानिकों को शोध में नई कामयाबी मिली है। इस शोध के अनुसार, जापानी वैज्ञानिकों का दावा है कि उन्होंने स्टेम सेल थेरेपी की मदद से स्पाइनल कॉर्ड (मेरुरज्जु) से जुड़ी समस्या का इलाज ढूंढ निकाला है और इस सफल प्रयोग के बाद लकवाग्रस्त लोग फिर से चलने में सक्षम हो सकते हैं। बता दें कि यह पहला मौका है जब स्पाइनल कॉर्ड के इलाज में स्टेम सेल थेरेपी का उपयोग सफलतापूर्वक किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, टोक्यो की कीयो यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इंड्यूस्ड प्लूरीपोटेंट स्टेम सेल्स (iPS) पर प्रयोग किया। इस तकनीक की मदद से परिपक्व हो चुकी कोशिकाओं को फिर से बाल अवस्था में लाया जाता है और उन्हें अलग-अलग कोशिकाओं में बदल कर विकसित किया जाता है। वैज्ञानिक शोधकर्ताओं ने दो मरीजों के स्पाइनल कॉर्ड में 20 लाख से अधिक iPS कोशिकाएं इंप्लांट कीं, जिसके परिणामस्वरूप मरीजों के स्पाइनल कॉर्ड के फंक्शन में काफी सुधार देखा गया और मरीजों में किसी तरह का कोई नकारात्मक असर नहीं हुआ।

स्टेम सेल थेरेपी की खासियत
ये स्टेम सेल कोशिकाएं बहुत खास होती हैं जो अपने जैसी कई कोशिकाओं को पैदा करने की क्षमता रखती हैं। ये खुद को किसी भी तरह की कोशिकाओं में बदल सकती हैं। ये स्टेम सेल सभी अंगों के उत्तकों में मौजूद रहती हैं। हालांकि इन कोशिकाओं की मदद से पहले भी कई तरह की बीमारियों के इलाज निकाले जा चुके हैं लेकिन स्पाइनल कॉर्ड का इलाज पहली बार सफल प्रयोग किया गया है।
वरदान साबित हो सकती है ये नई उम्मीद
इस शोध के मुख्य लेखक हिदेयुकी ओकानो के अनुसार, उनकी टीम अब जल्द ही क्लिनिकल ट्रायल शुरू करने की योजना बना रही है। यदि यह इलाज सफल रहता है तो यह तकनीक उन लोगों के लिए वरदान साबित हो सकती है जो स्पाइनल कॉर्ड के नुकसान की वजह से लकवाग्रस्त हो गए हैं। वहीं चिकित्सा क्षेत्र में स्टेम सेल थेरेपी महत्वपूर्ण योगदान निभाएगी।