नारी डेस्क: भारत में हेल्थ चेकअप की व्यवस्था में जल्द ही एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) एक ऐसी आधुनिक जांच तकनीक पर काम कर रहा है, जिससे मरीजों को बार-बार अलग-अलग टेस्ट कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अब सिर्फ एक ही ब्लड टेस्ट से कई बीमारियों की पहचान एक साथ हो सकेगी।
क्या है ICMR का नया मल्टीप्लेक्स डायग्नोस्टिक टेस्ट?
ICMR जिस नई तकनीक को विकसित कर रहा है, उसे मल्टीप्लेक्स डायग्नोस्टिक टेस्ट कहा जाता है। इस टेस्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एक ही सैंपल से डेंगू, कोविड-19, फ्लू, टाइफाइड जैसी कई बीमारियों का पता लगा सकता है। इससे बीमारी की पहचान जल्दी होगी और इलाज में होने वाली देरी भी खत्म हो सकेगी।

मौजूदा जांच प्रणाली में क्या दिक्कत है?
अभी अगर किसी मरीज को बुखार, खांसी या सांस लेने में परेशानी होती है, तो डॉक्टर लक्षण देखकर एक-एक करके टेस्ट लिखते हैं। पहले एक जांच होती है, अगर रिपोर्ट निगेटिव आती है तो दूसरी जांच कराई जाती है। इस प्रक्रिया में कई बार 2 से 4 दिन या उससे ज्यादा समय लग जाता है। तब तक मरीज की हालत बिगड़ने का खतरा बना रहता है।
आम लोगों पर बढ़ता आर्थिक बोझ
बार-बार अलग-अलग जांच कराने से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। कई बार लोग पैसों की वजह से जरूरी जांच नहीं करा पाते, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। नया मल्टीप्लेक्स टेस्ट इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकता है।
एंटीबायोटिक दवाओं के गलत इस्तेमाल पर लगेगी रोक
जांच रिपोर्ट में देरी के कारण डॉक्टर कई बार मरीज को तेज असर वाली एंटीबायोटिक दवाएं दे देते हैं, ताकि इंफेक्शन बढ़ न जाए। लेकिन यह तरीका लंबे समय में नुकसानदायक साबित होता है। ICMR की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कई एंटीबायोटिक दवाएं अब बैक्टीरिया पर असर नहीं कर पा रही हैं, जिसे एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) कहा जाता है।
सही समय पर सही दवा मिलेगी
अगर बीमारी की पहचान शुरुआत में ही हो जाए, तो डॉक्टर सिर्फ वही दवा देंगे जिसकी जरूरत है। इससे बेवजह एंटीबायोटिक लेने से बचाव होगा शरीर में दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता नहीं बढ़ेगी मरीज जल्दी ठीक हो सकेगा भारत की जरूरतों के अनुसार बनेगा स्वदेशी टेस्ट ICMR इन नई टेस्ट किट्स को भारत में होने वाली आम बीमारियों के डेटा के आधार पर तैयार कर रहा है। कोविड-19 महामारी ने यह सिखाया कि किसी भी बीमारी को समय रहते पहचानना कितना जरूरी है। यह नया सिस्टम भविष्य में किसी भी नए संक्रमण या महामारी को शुरुआती स्तर पर पकड़ने में मदद करेगा।

बच्चों के लिए भी खास तैयारी
ICMR बच्चों में एंटीबायोटिक दवाओं के बढ़ते गलत इस्तेमाल को लेकर भी चिंतित है। इसी वजह से बच्चों के लिए अलग और सटीक डायग्नोस्टिक टूल्स विकसित किए जा रहे हैं, ताकि उन्हें बिना जरूरत भारी दवाएं न दी जाएं।
कुल मिलाकर क्या होगा फायदा?
यह नई तकनीक
मरीजों का समय बचाएगी
इलाज का खर्च कम करेगी
सही और सटीक इलाज सुनिश्चित करेगी
देश में दवाओं के बेअसर होने की समस्या को कम करेगी
अगर यह मल्टीप्लेक्स टेस्ट सफल होता है, तो यह भारत की स्वास्थ्य जांच प्रणाली के लिए एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है।