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भाभी सोनिया को रिसिव करने पहुंचे थे देवर अमिताभ, जानिए उनका स्पेशल कनैक्शन

  • Edited By shipra rana,
  • Updated: 22 Feb, 2020 02:59 PM
भाभी सोनिया को रिसिव करने पहुंचे थे देवर अमिताभ, जानिए उनका स्पेशल कनैक्शन

बॉलीवुड में कपूर खानदान के बाद अगर कोई सबसे बड़ा और नामी खानदान है तो वो है बच्चन परिवार। इलहाबाद से जुडी इनकी जड़े आजतक मजबूत है। बॉलीवुड में आने के बाद भी अमिताभ अपने मिट्टी के लिए उतने ही वफादार है जैसे वो फिल्म बागबान में थे। लेकिन अमिताभ का इलाहाबाद के एक और नामी परिवार यानी इंदिरा गांधी के परिवार से एक खास रिश्ता था ? जी हां, गांधी और बच्चन परिवार एक साथ न जाने कितने जुग बीता चुके है। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर अब ऐसा क्या हो गया? वो अब पास क्यों नजर नहीं आते ?  तो आइए आपको बताते है कि गांधी और बच्चन परिवार का क्या है कनेक्शन?

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सबसे पहले बताते है कि यह कहानी शुरू कहां से हुई थी ? दरअसल, अमिताभ बच्चन के पिता यानी हरिवंश राय बच्चन जी फौरन ऑफिस में हिंदी अधिकारी थे। प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से उनका मिलना-जुलना लगा रहता था। वो मानों एक-दूसरे के जिगरी थे। वो एक-दूसरे की बहुत इज्जत करते थे। ऐसे में उनका अमेठी से होना सोने पर सुहागा-सा था। वहीं मां तेजी बच्चन, नेहरू जी की बेटी इंदिरा गांधी की पक्की सहेली बन गई। अमिताभ को इंदिरा गांधी बहुत मानती थी। वहीं एक और शख्स उनपर जान छिड़कते थे और वो थे राजीव गांधी।

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दिल्ली में आने के बाद भी यह रिश्ता बरकरार रहा। बतादें की 13 जनवरी 1968 की सुबह जब हर कोई ठिठुर रहा था, तब अपने दोस्त के प्यार यानी सोनिया गाँधी को कोई और नहीं बल्कि अमिताभ स्टेशन से लेने गए थे। यहां तक कि सोनिया अमिताभ के घर ही रुकी थी। भारतीय संस्कार भी, साड़ी पहनना और हिंदी बोलना किसी और ने नहीं तेजी जी ने ही सोनिया को सिखाया था।ख़बरों की मानें तो इंदिरा गांधी को अपने बेटे राजीव के लिए एक इटैलियन लड़की सोनिया पसंद नहीं थी। फिर क्या सबसे अच्छी सहेली तेजी ने ही उन्हें सोनिया के लिए हां करवाई।

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1984 की वो घड़ी आगई जब इंदिरा गांधी की हत्या हुई।1984 में अमिताभ और राजीव गांधी की दोस्ती इतनी मजबूत हो गई कि अमिताभ को कांग्रेस के टिकट पर इलाहाबाद से चुनाव लड़ने के लिए तैयार कर लिया। फिर उन्हें टिकट भी मिला और वो जीत भी गए। मगर न जाने क्यों उन्होंने तीन साल बाद पॉलीटिक्स की दुनिया छोड़ दी। रिपोर्ट्स तो यह वजह बता रहे थे कि बोफोर्स घोटाले में उनकी इन्वॉल्वमेंट को लेकर खबर छापी थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट की ओर से अमिताभ बच्चन को इस मामले में क्लीन चिट मिल गई। यह वो वक्त था जहां यह रिश्ता टूटने की कगार पर था। अब अमिताभ बॉलीवुड के शहंशाह बन गए। मगर एक फिल्म के बाद वो फ्लॉप होते गए।

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1991 में फिल्म 'हम' हिट होने के बाद अमिताभ की किस्मत फिर चमकी। 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद मानों उनके रिश्ते को किसी की नजर लग गई हो। अब बच्चन परिवार अपने बुरे वक्त का कसूरवार गांधी परिवार को मानने लगे। तब तक जया बच्चन इस परिवार में आ चुकी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमिताभ ने कहा था-गांधी परिवार उन्हें राजनीति में लेकर आया और परेशानी के समय उन्हें बीच में ही छोड़ गया।

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फिर एंट्री हुई अमर सिंह जी की, जिसके बाद गांधी परिवार से उनका रिश्ता टूट जी गया। जया भी सांसद का हिस्सा बन गई। जया ने एक बार कहा था-'जो लोग हमें राजनीति में लेकर आए, वो हमें संकट में छोड़कर चले गए। वो लोगों के साथ विश्वासघात करने वाले हैं।फिर राहुल गांधी ने कहा- 'बच्चन परिवार झूठ बोल रहा है। इतने सालों बाद वे क्यों आरोप लगा रहे हैं, अमिताभ बच्चन दो दशक पहले राजनीति में आए और अब उन्होंने अपनी वफादारी बदल ली है। जो लोग गांधी परिवार को जानते हैं। उन्हें पता है कि हमने किसी के साथ विश्वासघात नहीं किया। लोग जानते हैं कि किसने किसको धोखा दिया। लोग यह भी जानते हैं कि उनकी वफादारी किसके साथ है।'

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वहीं इसका जवाब देते हुए अमिताभ ने कहा-'वे लोग राजा हैं और हम रंक हैं। रिश्ते की निरंतरता शासक के मूड पर निर्भर करती है। अब, वे मेरे परिवार पर झूठ बोलने का आरोप लगा रहे हैं।'दुश्मन बाल ठाकरे के साथ अमिताभ की दोस्ती गांधी परिवार को रास नहीं आई। फिर कांग्रेस की तरफ से अमिताभ को लीलावती हॉस्पिटल में भर्ती होते ही एक नोटिस आया। जिसमें उन्हें  4.5 करोड़ रुपए का जुर्माना भरना था। उन्होंने वो पैसे बेड पर बुरी हालत में ही साइन कर के दिए। यह शायद आखिरी वक्त था जब उनके बीच कुछ हुआ हो। जो भी हो एक समय था जब इनदोनों परिवार में खास संबंध थे।
 

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