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Jaya Ekadashi 2026: 29 जनवरी को व्रत, इन नियमों की अनदेखी पड़ सकती है भारी

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 27 Jan, 2026 05:47 PM
Jaya Ekadashi 2026: 29 जनवरी को व्रत, इन नियमों की अनदेखी पड़ सकती है भारी

नारी डेस्क: जया एकादशी का व्रत सनातन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। माना जाता है कि जया एकादशी का व्रत रखने से जातक के सभी दुख-दर्द दूर होते हैं और अनंत सुख प्राप्त होता है। लेकिन इस व्रत में कुछ नियमों की अनदेखी करना पुण्यफल को घटा सकता है और व्रत का महत्व कम कर सकता है।

जया एकादशी 2026 की तिथि और समय

जया एकादशी इस वर्ष 29 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। लोग अक्सर 28 और 29 जनवरी के बीच दुविधा में रहते हैं। पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 28 जनवरी 2026 शाम 04:35 बजे से शुरू होकर 29 जनवरी दोपहर 01:55 बजे तक रहेगी। जया एकादशी का व्रत और पूजा 29 जनवरी को किया जाएगा। व्रत का पारण 30 जनवरी 2026 को सुबह 06:41 से 08:56 के बीच किया जा सकता है।

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एकादशी व्रत में करने से बचें ये काम

चावल का सेवन और दान

एकादशी तिथि पर चावल का सेवन और दान वर्जित है। हालांकि यह तिथि दान के लिए शुभ मानी जाती है, लेकिन इस दिन चावल का दान न करें। अपनी क्षमता के अनुसार अन्य वस्तुओं का दान कर सकते हैं।

वाणी और क्रोध पर संयम

व्रत के दौरान लड़ाई-झगड़े से दूर रहें। घर पर बच्चों या बुजुर्गों पर क्रोध न करें और वाणी पर संयम रखें। गुस्सा करना, जोर-जोर से बोलना या झूठ बोलकर पूजा करना व्रत का पुण्य कम कर देता है। याद रखें, व्रत सिर्फ भूखा रहने से नहीं बल्कि मन, वचन और कर्म से पूरा होता है।

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तुलसी को न तोड़ें

एकादशी तिथि पर तुलसी के पौधे को छूने या पत्तियां तोड़ने से बचें। ऐसा करने से भगवान विष्णु की कृपा नहीं मिलती और माना जाता है कि तुलसी का भी व्रत टूट सकता है।

सात्विकता का पालन

एकादशी के दिन सात्विक जीवनशैली का पालन करें। लहसुन, प्याज, मांस, मछली और मदिरा का सेवन वर्जित है। इसके अलावा मसूर की दाल, बैंगन और शहद का भी सेवन न करें।

ब्रह्मचर्य का पालन

एकादशी व्रत में ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य माना जाता है। इससे व्रत का पुण्य अधिक मिलता है और आध्यात्मिक लाभ बढ़ता है।

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जया एकादशी 2026 का व्रत 29 जनवरी को रखा जाएगा। इस दिन व्रत करने वाले जातक यदि इन नियमों का पालन ध्यानपूर्वक करते हैं, तो उन्हें आध्यात्मिक और सांसारिक दोनों तरह के लाभ प्राप्त होंगे। इसलिए व्रत के दौरान संयम, सात्विक आहार और पूजा के नियमों का पालन करना बेहद आवश्यक है।  

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