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एक श्राप के डर से यहां के लोग नहीं मनाते होली

  • Edited By neetu,
  • Updated: 28 Mar, 2021 11:24 AM
एक श्राप के डर से यहां के लोग नहीं मनाते होली

भारत देश में त्योहारों को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। ऐसे में लोग रंगों से खेलने के लिए उत्साहित होते हैं। कई जगहों पर लोग कई दिन पहले ही इसकी तैयारियों में जुट जाते हैं। मगर कई जगह ऐसी भी जहां पर यह त्योहार बनाने की मनाही है। शायद सुनने में आपको अजीब लगेगा। मगर यही सच है। असल में इन शहरों में होली ना मनाने के पीछे अजीबों-गरीब प्रथा है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से...

यहां 100 साल से नहीं मनाई गई होली 

भारत के झारखंड के बोकारों के पास कसमार ब्लॉक स्थित पर दुर्गापुर गांव है। कहा जाता है कि यहां के लोगों ने करीब 100 साल से होली का त्योहार नहीं मनाया है। इन लोगों का मानना है कि होली खेलने से गांव में महामारी फैल जाएगी। असल में, कई सालों पहले इस गांव के राजा के पुत्र की मृत्यु होली के दिन हुई थी। ऐसे में उस दिन के बाद से राजा ने गांववालों को होली खेलने की मनाही कर दी। 

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यहां 125 साल से नहीं मनाई गई होली

मध्य प्रदेश के बैतूल जिले की मुलताई तहसील में डहुआ गांव बसा हैं। माना जाता है कि इस गांव में करीब 125 साल से होली नहीं मनाई गई है। कहते है कि होली के दिन ही इस गांव के प्रधान की बावड़ी में डूब कर मौत हुई थी। इस घटना से गांव वाले दुखी होने के साथ डर गए थे। ऐसे में उन्होंने होली ना खेलने का फैसला किया। ऐसे में डहुआ गांव में होली ना मनाने की धार्मिक मान्यता प्रचलित हो गई। 

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यहां 150 साल से नहीं मनाई गई होली

हरियाणा के कैथल के गुहल्ला चीका गांव के लोगों ने पिछले 150 साल से होली का त्योहार नहीं मनाया है। माना जाता है कि यहां पर एक ठिगने कद का बाबा रहता है। उसके कद के कारण लोगों ने उसका मजाक उड़ाया था। साथ ही उस दिन होली का त्योहार था। ऐसे में उस बाबा ने होली दहन की अग्नि में कूद कर अपनी जान दे दी। साथ ही उस बाबा ने आत्महत्या करने से पहले गांव वालों को होली ना मनाने का शाप दिया था। बाबा ने होली मनाने वाले के परिवार का नाश होने का शाप दिया। ऐसे में उस डर के चलते इस गांव के लोगों ने होली मनाना बंद कर दिया। कहा जाता है कि लोगों द्वारा मांफी मांगने पर बाबा ने उन्हें इस शाप से मुक्ति पाने का एक उपाय बताया था। उस बाबा ने कहा, आने वाले समय में होली के दिन किसी के घर बेटा होगा और उसी दिन गाय बछड़े को जन्म देगी तो गांव शाप से मुक्त हो जाएगा। मगर अभी तक यह शुभ संयोग आया नहीं है। ऐसे में अभी इस गांव में ना होली खेलते हैं और ना कोई एक-दूसरे को इसकी बधाई देता है। 

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यहां महिला को होली खेलने की इजाजत 

उत्तर प्रदेश के कुंडरा नाम के गांव में भी कई सालों से होली खेलने में मनाही है। मगर यहां पर महिलाएं बेझिझ होली खेलने का मजा उठा सकती है। कहा जाता है कि होली के दिन मेमार सिंह नाम के एक डकैत ने एक गांव वाले की हत्या की थी। उस दिन से गांववालों ने होली मनानी बंद कर दी थी। मगर कई सालों बाद इस गांव की महिलाओं को होली मनाने की इजाजत दी गई। ऐसे में इस दिन पुुरुष काम करने खेतों में चले जाते हैं। सिर्फ महिलाएं एक साथ राम जानकी मंदिर में मिल कर होली खेलने का मजा लेती है।

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