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ब्रेन स्ट्रोक से बचने का फॉर्मूला- याद रखें 'BE FAST', बच सकती है जान

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 12 Feb, 2026 12:35 PM
ब्रेन स्ट्रोक से बचने का फॉर्मूला- याद रखें 'BE FAST', बच सकती है जान

नारी डेस्क: ब्रेन स्ट्रोक या पैरेलिसिस अचानक किसी के साथ भी हो सकता है और यह जीवन के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। आधुनिक लाइफस्टाइल, जंक फूड और कोविड महामारी के बाद ब्रेन स्ट्रोक के मामलों में वृद्धि देखी गई है। ऐसे में अगर किसी को स्ट्रोक हो जाए तो समय रहते सही कदम उठाना बेहद जरूरी है। अगर लोग ‘BE FAST’ फॉर्मूला को याद रखें, तो मरीज की जान बचाई जा सकती है और आजीवन दिव्यांगता से भी बचाव संभव है।

BE FAST फॉर्मूला क्या है?

‘BE FAST’ फॉर्मूला स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण पहचानने का आसान तरीका है। इसका मतलब है

B – Balance (संतुलन): अगर किसी का बैलेंस अचानक गड़बड़ाने लगे या चलने में दिक्कत हो।

E – Eyes (आंखें): अचानक दृष्टि कम होना या चीजें दिखाई न देना।

F – Face (चेहरा): चेहरे पर असमानता, मुंह का झुकना या मुस्कान में बदलाव।

A – Arms (हाथ): हाथ या पैर अचानक नहीं उठना या कमजोरी महसूस होना।

S – Speech (बोलने में दिक्कत): सही ढंग से बोल न पाना, शब्दों का घुलना।

T – Time (समय): इन लक्षणों में से कोई भी दिखाई दे तो तुरंत अस्पताल पहुंचें।

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अनुसार, अगर साढ़े चार घंटे के अंदर मरीज अस्पताल पहुंच जाए और उचित इलाज, जैसे क्लॉट घोलने वाली दवा या मैकेनिकल क्लॉट रिमूवल प्रोसीजर, मिल जाए, तो मरीज सामान्य हो सकता है और गंभीर ब्रेन डैमेज से बच सकता है।

ब्रेन स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण

ब्रेन स्ट्रोक अक्सर कुछ स्पष्ट संकेतों के साथ आता है, जिन्हें पहचानना जीवन रक्षक हो सकता है सिरदर्द या माइग्रेन की अचानक तीव्रता। अचानक चक्कर आना या बेहोशी। चलने में परेशानी, संतुलन या कोऑर्डिनेशन की कमी। देखने में दिक्कत, धुंधला या आधा दृश्य दिखाई देना। बोलने में समस्या या शब्दों का सही तरीके से उच्चारण न कर पाना। निगलने में कठिनाई महसूस होना।  अगर ये लक्षण दिखाई दें, तो समय रहते इमरजेंसी मेडिकल सहायता लेना बेहद जरूरी है।

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स्ट्रोक का समय पर इलाज कितना महत्वपूर्ण है

कहते हैं कि स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है। खासकर इस्कीमिक स्ट्रोक में ‘गोल्डन आवर’ बहुत अहम होता है। समय पर इलाज सेनस में ब्लॉक हुआ क्लॉट घोला जा सकता है। क्लॉट रिमूवल प्रोसीजर के जरिए ब्रेन डैमेज कम किया जा सकता है। मरीज की पूरी रिकवरी और जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।

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ब्रेन स्ट्रोक का मेडिकल मैनेजमेंट

स्ट्रोक के इलाज में आधुनिक थ्रोम्बोलाइटिक थेरेपी, एंटीकोएगुलेंट्स और एंटीप्लेटलेट मेडिकेशन शामिल हैं। इसके साथ ब्लड प्रेशर कंट्रोल और लाइफस्टाइल सुधार भी जरूरी है। सिर्फ स्ट्रोक ही नहीं, बल्कि अन्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियों जैसे मिर्गी और मूवमेंट डिसऑर्डर्स में भी समय पर डायग्नोसिस और लगातार इलाज जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बना सकता है। आधुनिक दवाएं और सर्जिकल इंटरवेंशन इन बीमारियों के प्रभावी इलाज में मदद करते हैं।

डॉक्टर की सलाह

यदि किसी को स्ट्रोक या न्यूरोलॉजिकल समस्या के लक्षण दिखाई दें, तो समय गंवाए बिना अस्पताल जाएं। लाइफस्टाइल सुधारें, जंक फूड कम करें और नियमित हेल्थ चेकअप कराएं। समय पर सावधानी और इलाज से जीवन को सुरक्षित और स्वस्थ रखा जा सकता है।  

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