नारी डेस्क: सोना हमेशा से भारतीय निवेशकों के लिए सबसे भरोसेमंद और पसंदीदा निवेश रहा है। हर महिला के लिए सोना हमेशा खास रहा है। भारतीय परंपरा में सोने का बड़ा महत्व है शादी हो या कोई त्योहार, सोना खरीदना और पहनना हमेशा से आम बात रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पिछले 10 साल में भारत में सोने की कीमतों में कितना बदलाव आया है? इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि कैसे 2015 से 2025 तक सोने के दाम बदलते गए और कितनी तेजी से बढ़े।
2010 – शुरुआती स्तर
वर्ष 2010 में भारत में सोने की कीमत लगभग ₹18,500 प्रति 10 ग्राम थी। उस समय सोना महंगा निवेश माना जाता था, लेकिन आज की तुलना में यह काफी सस्ता था। घरेलू और वैश्विक आर्थिक हालात स्थिर थे, और सोने की मांग अपेक्षाकृत कम थी।
2014-2015 – धीरे-धीरे बढ़ती कीमतें
साल 2014-15 में सोने की कीमत लगभग ₹26,000–₹28,000 प्रति 10 ग्राम के आसपास रही। इस दौरान घरेलू अर्थव्यवस्था में बदलाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में हल्की अनिश्चितताओं के चलते सोने की कीमतों में स्थिर लेकिन धीमा उछाल देखने को मिला।
2020 – कोविड काल और तेज उछाल
कोविड-19 महामारी ने वैश्विक और घरेलू आर्थिक स्थिति को हिला कर रख दिया। इसी दौरान सोने की कीमतों में तेजी देखी गई। 2020 तक सोने का भाव लगभग ₹48,000+ प्रति 10 ग्राम तक पहुँच गया। निवेशकों ने शेयर बाजार की बजाय सोने को सुरक्षित विकल्प माना। इस साल सोना निवेश के लिए सबसे भरोसेमंद विकल्प बन गया।
2024-2025 – रिकॉर्ड स्तर पर सोने की कीमतें
2024-25 में सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। 10 ग्राम सोना ₹75,000 से लेकर ₹1,33,195+ में बिक रहा है। पिछले 10 वर्षों में सोने के दाम लगभग दो से तीन गुना बढ़ चुके हैं। यह तेजी केवल घरेलू कारणों से नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, युद्ध, महंगाई और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग के चलते आई है।
निवेश के लिहाज से सोना कितना फायदेमंद रहा?
सोने ने पिछले 10 वर्षों में निवेशकों को स्थिर और मजबूत सालाना रिटर्न (CAGR) दिया है। उतार-चढ़ाव के बावजूद, लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए सोना एक भरोसेमंद विकल्प रहा है। इसके कुछ फायदे इस प्रकार हैं।
महंगाई से बचाव: सोना मुद्रास्फीति के समय पैसा सुरक्षित रखने का बेहतरीन विकल्प है।
करेंसी वैल्यू में गिरावट से सुरक्षा: रुपये के कमजोर होने पर सोना निवेशकों के लिए सुरक्षित बचाव है।
संकट के समय सुरक्षित निवेश: वैश्विक आर्थिक संकट या युद्ध जैसी स्थितियों में सोना सबसे भरोसेमंद संपत्ति रहता है।
सोने की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?
सोने की कीमतों में तेजी के पीछे कई बड़े कारण हैं।
दुनिया में अस्थिर हालात : युद्ध, मंदी और भू-राजनीतिक तनाव सोने की मांग को बढ़ाते हैं।
बढ़ती महंगाई: महंगाई के चलते निवेशक सोने को सुरक्षित विकल्प मानते हैं।

डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी: अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपये कमजोर होने पर सोने की कीमतें बढ़ती हैं।
सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग: आर्थिक अनिश्चितता और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के चलते निवेशक सोने की ओर आकर्षित होते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक आर्थिक हालात अस्थिर बने रहते हैं, तो आने वाले समय में भी सोने की कीमतों में मजबूती बनी रह सकती है। हालांकि निवेश से पहले बाजार की चाल और विशेषज्ञों की सलाह लेना जरूरी है।
बीते 15 वर्षों में सोना आम निवेशकों के लिए सबसे सुरक्षित और फायदे का सौदा साबित हुआ है। 2010 में ₹18,500 प्रति 10 ग्राम से शुरू होकर आज ₹75,000–₹1,33,195 तक पहुंचने वाली कीमत यह दिखाती है कि सोना लॉन्ग-टर्म निवेश के लिए सबसे भरोसेमंद विकल्प बना हुआ है।