नारी डेस्क: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में माता-पिता बच्चों की पढ़ाई को सबसे ज्यादा अहम मानने लगे हैं। अच्छे नंबर और बेहतर रिजल्ट को ही वे बच्चों के भविष्य की कुंजी समझते हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों पर पढ़ाई का जरूरत से ज्यादा दबाव डालना उनकी सेहत और मानसिक शांति के लिए ठीक नहीं होता। विशेषज्ञों के अनुसार, हर बच्चा एक जैसा नहीं होता। कोई पढ़ाई में अच्छा होता है तो किसी में खेल, संगीत, कला या रचनात्मकता की विशेष प्रतिभा होती है। केवल अकादमिक प्रदर्शन के आधार पर बच्चे की क्षमता या भविष्य को आंकना सही नहीं है।
पढ़ाई का बेहद दबाव बन सकता है तनाव की वजह
आजकल बच्चों से बेहतर अंक लाने, कोचिंग क्लासेज़ करने और प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने की अपेक्षा की जाती है। इससे बच्चों पर मानसिक दबाव बढ़ जाता है, जो आगे चलकर तनाव, चिंता, अवसाद और आत्मविश्वास की कमी जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।
इसके अलावा कम उम्र में अधिक तनाव से थकान, नींद की कमी और मोटापा जैसी शारीरिक समस्याएं भी देखने को मिलती हैं।

खेल और शारीरिक गतिविधि बच्चों के विकास के लिए जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि बच्चों के समग्र विकास के लिए खेलना और शारीरिक गतिविधियां बेहद जरूरी हैं। खेल के माध्यम से बच्चे संवाद करना, समस्याओं को सुलझाना, टीमवर्क, रचनात्मक सोच और सामाजिक व्यवहार जैसे महत्वपूर्ण जीवन कौशल सीखते हैं। शारीरिक गतिविधि से न केवल शरीर मजबूत होता है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है, तनाव कम होता है और आत्मसम्मान बढ़ता है।
घर में सकारात्मक सीखने का माहौल बनाएं
माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों के लिए घर में सहायक और सकारात्मक वातावरण तैयार करें। बच्चों को सवाल पूछने, अपनी जिज्ञासा जाहिर करने और अपनी रुचियों को पहचानने का मौका मिलना चाहिए। जब बच्चे खुद सीखने में रुचि लेते हैं, तो उनमें पढ़ाई के प्रति स्वाभाविक लगाव विकसित होता है।
पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि पढ़ाई जरूरी है, लेकिन इसके साथ-साथ खेल, मनोरंजन और आराम भी उतना ही आवश्यक है। माता-पिता बच्चों को आउटडोर खेलों, खेलकूद गतिविधियों और फिटनेस से जुड़ी कक्षाओं में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।

माता-पिता की भूमिका सबसे अहम
अभिभावकों को बच्चों से अवास्तविक अपेक्षाएं नहीं रखनी चाहिए और न ही उनकी तुलना दूसरों से करनी चाहिए। बच्चों को अपनी गति से सीखने और आगे बढ़ने का अवसर देना बहुत जरूरी है। बच्चों के प्रयासों की सराहना करना, न कि केवल परिणामों पर ध्यान देना, उनके आत्मविश्वास को मजबूत करता है।
अकादमिक सफलता ही सब कुछ नहीं
विशेषज्ञों का कहना है कि अकादमिक सफलता बच्चे की प्रतिभा या भविष्य का अकेला पैमाना नहीं है। खेल, कला, संगीत और अन्य रचनात्मक क्षेत्रों में भी बच्चे शानदार भविष्य बना सकते हैं। हर बच्चे की अपनी ताकत और रुचियां होती हैं, जिन्हें पहचानना और प्रोत्साहित करना माता-पिता की जिम्मेदारी है।
बच्चों को आराम और खाली समय भी चाहिए
बच्चों को तरोताजा और तनावमुक्त रहने के लिए आराम और खाली समय (डाउनटाइम) की जरूरत होती है। इससे उनका मानसिक संतुलन बना रहता है और वे बेहतर तरीके से सीख पाते हैं। बच्चों को पढ़ाई के दबाव में डालने के बजाय उन्हें खुलकर बचपन जीने देना चाहिए। खेल, पढ़ाई, आराम और रुचियों के बीच संतुलन बनाकर ही बच्चे का स्वस्थ विकास संभव है। जब माता-पिता बच्चों को तनावमुक्त वातावरण देते हैं, तो वे आत्मविश्वासी, खुशहाल और सफल भविष्य की ओर बढ़ते हैं।
