22 JANTHURSDAY2026 7:18:32 PM
Nari

29 साल के युवक के दिमाग को खाने लगा कीड़ा, पेट के निशान से डॉक्टर ने बचाई जान

  • Edited By Monika,
  • Updated: 22 Jan, 2026 05:57 PM
29 साल के युवक के दिमाग को खाने लगा कीड़ा, पेट के निशान से डॉक्टर ने बचाई जान

नारी डेस्क : नोएडा से एक चौंकाने वाला और डराने वाला मेडिकल केस सामने आया है, जहां 29 साल के एक युवक के दिमाग में बेहद दुर्लभ इंफेक्शन फैल गया। हैरानी की बात यह रही कि शुरुआती जांच और MRI रिपोर्ट में भी यह बीमारी पकड़ में नहीं आई। हालत बिगड़ने पर जब युवक को दूसरे अस्पताल ले जाया गया, तब एक अनुभवी डॉक्टर ने पेट पर मौजूद छोटे से निशान को देखकर असली बीमारी पहचान ली और समय रहते उसकी जान बचा ली।

MRI भी नहीं पकड़ पाया खतरनाक ब्रेन इंफेक्शन

जानकारी के मुताबिक युवक को पिछले एक हफ्ते से तेज बुखार, लगातार नींद आना, व्यवहार में बदलाव और सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। पहले अस्पताल में जांच के दौरान MRI रिपोर्ट सामान्य आई, जिसके बाद उसे यह कहकर भेज दिया गया कि कोई गंभीर समस्या नहीं है। लेकिन हालत लगातार बिगड़ती गई और उसे दूसरे अस्पताल में ICU में भर्ती करना पड़ा।

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शराब छोड़ने की नहीं, कीड़े के काटने की थी वजह

युवक ने हाल ही में शराब छोड़ दी थी, इसलिए शुरुआत में उसके लक्षणों को शराब छोड़ने से जुड़े लक्षण (Withdrawal Symptoms) मान लिया गया। लेकिन ग्रेटर नोएडा स्थित  अस्पताल के डॉक्टर ने गहराई से जांच की। उन्होंने मरीज के पेट पर एक छोटा सा काला, पपड़ी जैसा निशान देखा, जिसे मेडिकल भाषा में एस्कार (Eschar) कहा जाता है।

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एक छोटे से निशान ने खोला बीमारी का राज

डॉक्टर के अनुसार, यह निशान स्क्रब टाइफस नाम की बीमारी का सबसे बड़ा संकेत होता है। जांच में सामने आया कि मरीज Rickettsial Meningoencephalitis नामक दुर्लभ और जानलेवा ब्रेन इंफेक्शन से पीड़ित था। यह बीमारी आमतौर पर कीड़ों के काटने से फैलती है और समय पर इलाज न मिलने पर कोमा या मौत तक का कारण बन सकती है।

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कैसे फैलती है यह खतरनाक बीमारी

यह एक ज़ूनोटिक बीमारी है, यानी जो जानवरों से इंसानों में फैलती है। इसे फैलाने वाले बैक्टीरिया अक्सर चिगर्स (Chiggers) नामक कीट के लार्वा के जरिए शरीर में प्रवेश करते हैं। जब यह संक्रमण दिमाग तक पहुंच जाता है, तो ब्रेन में गंभीर सूजन पैदा हो जाती है।

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डॉक्टरों के अनुभव ने बचाई जान

हालांकि MRI में दिमाग में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं दिखी, लेकिन डॉक्टरों ने अपने अनुभव के आधार पर रिस्क लेते हुए तुरंत आक्रामक इलाज शुरू किया। मरीज को एंटीबायोटिक्स, एंटीवायरल दवाएं और हाई-डोज स्टेरॉयड दिए गए। हालत इतनी गंभीर थी कि उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखना पड़ा, लेकिन कई दिनों की मेहनत के बाद उसकी स्थिति में सुधार हुआ और अब वह खतरे से बाहर है।

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समय पर पहचान ही है सबसे बड़ा बचाव

डॉक्टर का कहना है कि स्क्रब टाइफस जैसी बीमारियों में शरीर पर दिखने वाले छोटे काले निशानों को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर तेज बुखार के साथ भ्रम, व्यवहार में बदलाव या अत्यधिक नींद आने जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट या विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें।

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