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झगड़े से भी ज्यादा खतरनाक है  Silent Treatment, रिश्ता बचाना है तो पार्टनर के साथ बातचीत ना करें बंद

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 19 Feb, 2025 07:17 PM
झगड़े से भी ज्यादा खतरनाक है  Silent Treatment, रिश्ता बचाना है तो पार्टनर के साथ बातचीत ना करें बंद

नारी डेस्क: कपल के बीच मनमुटाव होना आम बात है, पर कुछ लोग बात सुलझाने की बजाय साइलेंट ट्रीटमेंट अपनाते हैं।  यानी जब आपका साथी बिना किसी स्पष्टीकरण के बातचीत बंद कर देता है या आपको अनदेखा करता है, तो इसे साइलेंट ट्रीटमेंट कहा जाता है। इसे भावनात्मक दुर्व्यवहार का एक रूप भी माना जा सकता है क्योंकि इससे रिश्ते में समझदारी और आत्म-सम्मान पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।  साइलेंट ट्रीटमेंट किसी  समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि यह  इसे और बढ़ा देता है। इसलि  जब भी आपके या आपके साथी के मन में कोई समस्या हो, तो उसे खुलकर बातचीत के माध्यम से सुलझाएं। 

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साइलेंट ट्रीटमेंट का सामना कैसे करें 

पहले तो गुस्सा या निराशा में आने से बचें। शांत मन से सोचें कि शायद आपका साथी किसी परेशानी में है या उसकी भावनाओं का प्रकट न होना उसकी समस्या है। एक उपयुक्त समय चुनें जब दोनों शांत हों और बातचीत के लिए तैयार हों। अपने साथी से शांति से पूछें कि क्या कुछ परेशान कर रहा है और क्या आप उसकी मदद कर सकते हैं। संवाद की शुरुआत सहानुभूति और समझदारी से करें। बिना आरोप लगाए अपने मन की बात रखें। कहें कि जब आपसे बातचीत नहीं होती, तो आपको कैसा महसूस होता है और इससे रिश्ते में दूरी पैदा होती है।

 

सीमा तय करना जरूरी 

यह समझें कि लगातार साइलेंट ट्रीटमेंट आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। यदि यह व्यवहार दोहराया जाए, तो अपने लिए कुछ सीमा निर्धारित करें और आवश्यक हो तो काउंसलिंग या थेरपी की सलाह लें। समस्या के मूल कारण को समझने की कोशिश करें। यदि कोई छोटी बात है, तो उसे सुलझाने का प्रयास करें। यदि मामला गंभीर है, तो पेशेवर मदद लेने से हिचकिचाएं नहीं।

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 साइलेंट ट्रीटमेंट के नुकसान 


साइलेंट ट्रीटमेंट एक तरह का भावनात्मक दुर्व्यवहार है जो साथी के आत्म-सम्मान और आत्मविश्वास को ठेस पहुंचाता है। इससे रिश्ते में दूरियां बढ़ती हैं और भावनात्मक घाव गहरे होते हैं। बिना बातचीत के समस्याओं का समाधान संभव नहीं होता। साइलेंट ट्रीटमेंट से समस्या और भी जटिल हो जाती है क्योंकि दोनों पक्षों के बीच संवाद रुक जाता है। जब आप अपने साथी को साइलेंट ट्रीटमेंट देते हैं, तो इससे आपसी विश्वास में दरार पड़ती है। रिश्ते में पारदर्शिता और खुले संवाद से ही संबंध मजबूत होते हैं।  यह व्यवहार आपके साथी को अकेलापन, निराशा और असुरक्षा का अनुभव कराता है, जिससे उनकी मानसिक स्थिति प्रभावित हो सकती है।


 

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