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चीन की चौकानें वाली रिपोर्ट, कोरोना से ठीक हुए मरीजों के फेफड़े हुए खराब!

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 07 Aug, 2020 03:07 PM
चीन की चौकानें वाली रिपोर्ट, कोरोना से ठीक हुए मरीजों के फेफड़े हुए खराब!

कोरोना महामारी के कहर अभी भी कई शहरों में जारी है। वैज्ञानिक ना सिर्फ कोरोना के वैक्सीन खोजने में लगे हैं बल्कि आए दिन नए प्रयोग भी कर रहे हैं। चीन के जिस वुहान शहर से यह वायरस फैला था अब वहीं से एक चौकांने वाली रिपोर्ट सामने आई है। इसी बीच चीन ने एक चौकानें वाली रिपोर्ट पेश की। चीन की इस नई रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना से ठीक हुए मरीजों में फेफड़े खराब होने की समस्या देखने को मिली।

कोरोना से ठीक हुए तो मरीजों के फेफड़े हुए खराब!

दरअसल, वुहान शहर में पेंग झिंयोग की एक टीम कोरोना से ठीक हुए 100 मरीजों पर लगातार नजर रख रही थी। वह लोगों के घर जाकर उनकी सेहत की जानकारी भी लेते थे। एक साल चलने वाले इस सर्वे का पहला फेज जुलाई में खत्म हुआ, जिसमें सामने आया कि कोरोना से ठीक हुए मरीजों के फेफड़े खराब हो गए हैं। यही नहीं, ठीक हुए 5 फीसदी मरीजों के फेफड़े इतनी बुरी तरह से खराब हो गए कि उन्हें दोबारा क्वारंटीन करना पड़ा।

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वेंटिलेशन और दवा का नहीं हुआ असर

सामने आई रिपोर्ट में 90% लोग ऐसे थे, जिनके फेफड़े अब भी खराब थे। इसका मतलब उनके फेफड़ों का वेंटिलेशन और गैस एक्सचेंज फंक्शन अभी तक स्वस्थ लोगों के स्तर पर नहीं पहुंच पाया। जबकि कुछ मरीज तो ऐसे हैं, जिन्हें हॉस्पिटल से छुट्टी लेने के 3 महीने बाद भी ऑक्सीजन सिलेंडर का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।

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मरीजों को दोबारा किया जाएगा क्वारंटीन

सर्वे में मरीजों के साथ 6 मिनट का वॉक टेस्ट भी किया गया, जिसमें सामने आया कि मरीज सिर्फ 400 मीटर ही चल पा रहे थे। जबकि एक स्वस्थ व्यक्ति 6 मिनट में 500 मीटर तक चल सकता है। 5% मरीज ऐसे थे, जिनका कोरोना न्यूक्लिक एसिड टेस्ट नेगेटिव और इम्यूनोग्लोब्यूलिन एम टेस्ट पॉजिटिव पाया गया। ऐसे मरीजों को दोबारा क्वारंटीन या होम आइसूलेशन करना पड़ता है।

65 से अधिक उम्र वाले लोगों पर रखी गई निगरानी

टीम द्वारा 65 साल से अधिक उम्र वाले लोगों पर भी नजर रखी गई, जिसमें 100 में से 10 मरीजों के शरीर में एंटीबॉडी खत्म हो चुकी थी। वहीं, कुछ मरीजों के इम्युन सिस्टम और बी-सेल्स की संख्या में भी भारी कमी देखी गई जबकि उनमें टी सेल्स की संख्या अधिक थी। बता दें कि वायरस को खत्म करने में इनका अहम योगदान होता है।

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