
नारी डेस्क: कर्तव्य पथ पर 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर आयोजित परेड में‘ इंटीग्रेटेड ऑपरेशंस सेंटर 'दस्ते की कमान कैप्टन समीरा बुट्टर ने संभाली और इस दौरान उन्होंने सेना के सर्वोच्च आदर्श‘सेवा परमो धर्म'का पालन किया। चौथी पीढ़ी की सैन्य अधिकारी कैप्टन बुट्टर ने हाल ही में अपने पिता कर्नल सरबजीत सिंह बुट्टर (सेवानिवृत्त) के निधन के व्यक्तिगत दुख के साये में परेड में हिस्सा लिया। कैप्टन समीरा बुट्टर ने इस व्यक्तिगत छवि के बावजूद नेतृत्व का दायित्व संभालने का निर्णय लिया।
इस दायित्व को मिलने पर उन्होंने कहा था- 'इस गणतंत्र दिवस परेड में दस्ता कमांडर बनना मेरे पिता को मेरी श्रद्धांजलि है।' उनके शब्द कठिन अभ्यास और धैर्य से भरे कई हफ्तों की मेहनत की गूंज हैं। कैप्टन बुट्टर ने यूनीवार्ता के साथ बातचीत में कहा कि देश के प्रति कर्तव्य उनकी रगों में बसता है। वह 19 पंजाब रेजिमेंट के महावीर चक्र से सम्मानित ब्रिगेडियर संपूरण सिंह बुट्टर (सेवानिवृत्त) की पोती हैं। उन्होंने कहा- 'मैं बचपन से ही सेना में जाना चाहती थी। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को समर्पित झांकी की दस्ता कमांडर बनना किसी भी अधिकारी के लिए सपने के सच होने जैसा है।'
हालांकि इस गणतंत्र दिवस परेड में उनके परिवार की उपस्थिति नहीं होगी। उन्होंने कहा- 'परिवार हाल ही में हुई क्षति के कारण परेड में शामिल नहीं हो पाएगा। लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि मेरे पिता ऊपर से मुझे वैसे ही प्रोत्साहित कर रहे होंगे, जैसे वे हमेशा करते थे।' उनके परदादा रिसालदार मेजर रत्तन सिंह ने भी कैवेलरी रेजिमेंट में सेवा दी थी। कैप्टन बुट्टर ने कहा, 'इंटीग्रेटेड ऑपरेशनल सेंटर झांकी ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को दर्शाती है। यह हमारी एकीकृत सोच, तैयारियों और स्वदेशी क्षमताओं को दर्शाती है और आत्मनिर्भर भारतीय सेना का सच्चा प्रतीक है।'