
नारी डेस्क : बिहारी फिल्म अभिनेता और निर्माता हैदर कजमी के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनकी मां नर्जिस कजमी का 87 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। मां के निधन की खबर मिलते ही न सिर्फ परिवार, बल्कि फिल्म जगत में भी शोक की लहर दौड़ गई है। हैदर कजमी के करीबी और चाहने वाले इस दुखद घड़ी में उनके साथ संवेदना जता रहे हैं।
मां, जो हर सपने की सबसे बड़ी ताकत थीं
हैदर कजमी ने बताया कि उनकी मां को फिल्मों से गहरा लगाव था। वे उनके काम को समझती थीं और हर कदम पर आगे बढ़ने के लिए उन्हें हौसला देती थीं। जहानाबाद जिले के काको प्रखंड के पाली गांव में बनी हैदर कजमी फिल्म सिटी की देखरेख भी उनकी मां खुद करती थीं। हालांकि, इतने बड़े फिल्मी माहौल से जुड़ाव के बावजूद उन्हें सादा और गांव की जिंदगी ही ज्यादा पसंद थी। वे हमेशा जमीन से जुड़ी रहीं और सादगी के साथ जीवन बिताया।

बेटे के फिल्मी सफर की सच्ची मार्गदर्शक
हैदर कजमी के फिल्मी करियर में उनकी मां सिर्फ एक मां नहीं, बल्कि एक मजबूत मार्गदर्शक और प्रेरणा स्रोत भी थीं। हर मुश्किल दौर में वे बेटे के साथ चट्टान की तरह खड़ी रहीं। हैदर कजमी कई बार सार्वजनिक मंचों पर यह कह चुके हैं कि आज वे जिस मुकाम पर हैं, उसमें उनकी मां का योगदान सबसे बड़ा है।
मां को याद कर भावुक हुए हैदर कजमी
मां को याद करते हुए हैदर कजमी भावुक हो गए। उन्होंने कहा, बहुत दुख के साथ मैं यह बताना चाहता हूं कि मेरी प्यारी मां नरजिस कजमी आज शाम हमें छोड़कर चली गईं। वह मेरी परी, मेरी ताकत और इस जीवन का सबसे बड़ा आशीर्वाद थीं। उन्होंने आगे कहा कि मां से मिला प्यार और अपनापन शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। उनके लिए मां एक ऐसी रोशनी थीं, जो हमेशा दुआ बनकर साथ रहेंगी।
पाली गांव में होगा अंतिम संस्कार
हैदर कजमी ने बताया कि उनकी मां की अंतिम इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार पाली गांव में ही किया जाए। उनकी इस इच्छा का सम्मान करते हुए आज शाम मिट्टी मंजिल, पाली में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। अभिनेता ने सभी से अपील की है कि वे उनकी मां की मगफिरत के लिए दुआ करें और ईश्वर से प्रार्थना करें कि उन्हें जन्नत-उल-फिरदौस में आला मुकाम मिले और परिवार को इस गहरे दुख को सहने की ताकत दे।