
नारी डेस्क: मध्य प्रदेश की प्रीति उन्हाले ने भारत में हार्ट ट्रांसप्लांट इतिहास रच दिया है। 25 साल पहले उनका दिल खराब हो गया था और उनकी जान मुश्किल में थी। तब दिल्ली एम्स के डॉक्टर्स ने हार्ट ट्रांसप्लांट कर उन्हें नई जिंदगी दी। अब प्रीति ने डोनर हार्ट के साथ 25 साल पूरे कर लिए हैं और वे भारत की सबसे लंबे समय तक जीवित रहने वाली हार्ट ट्रांसप्लांट सर्वाइवर बन गई हैं।
हार्ट की गंभीर बीमारी
प्रीति को तब डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी डायग्नोज हुआ था। यह एक गंभीर बीमारी है, जिसमें दिल की मांसपेशियां कमजोर और फैली हुई हो जाती हैं। इसके कारण दिल की पंपिंग क्षमता कम हो जाती है और अंततः हार्ट फेल्योर हो जाता है। प्रीति की उम्र उस समय केवल 26 साल थी।

दिल्ली एम्स में इलाज
प्रीति बेहद नाजुक हालत में दिल्ली एम्स पहुंची थीं। उनके जीवन को बचाने की आखिरी उम्मीद वही थी। एम्स के प्रख्यात कार्डियोथोरेसिक सर्जन डॉ. पी. वेणुगोपाल और कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. केके तलवार ने उन्हें आश्वस्त किया कि उनकी जान बच सकती है। क्लीनिकल गाइडलाइंस उस समय सीमित थीं, लेकिन सभी जांचों और इंतजार के बाद जनवरी 2001 में एक ब्रेन-डेड किशोर डोनर का हार्ट प्रीति को मिला। इस ट्रांसप्लांट के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया।
ट्रांसप्लांट के बाद की चुनौतियां
हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद प्रीति को रोजाना इम्यूनोसप्रेसेंट दवाइयां लेनी पड़ीं। कई बार उन्हें ऑर्गन रिजेक्शन का सामना करना पड़ा, लेकिन डॉक्टर्स की देखभाल और अनुशासन के साथ वे सभी मुश्किलों से उबर गईं।
आज का जीवन और संदेश
आज 51 साल की प्रीति न सिर्फ अपने जीवन का आनंद ले रही हैं, बल्कि देशभर में हार्ट ट्रांसप्लांट मरीजों को काउंसलिंग भी देती हैं। उनका संदेश साफ है अगर डॉक्टर ट्रांसप्लांट की सलाह दें, तो देरी न करें। डोनर दुर्लभ होते हैं, मौका मिले तो तुरंत हां कहें।अनुशासन और नियमित इलाज के साथ जिंदगी पूरी तरह जिएं। यह दूसरा मौका है, जो हमें मिला है, इसे पूरी तरह जीएं।

हार्ट ट्रांसप्लांट की सफलता
प्रीति का यह रिकॉर्ड भारत में हार्ट ट्रांसप्लांट की सफलता का प्रतीक है। सीमित संसाधनों के बावजूद यह ट्रांसप्लांट मिसाल बन गया है। उनकी कहानी यह भी दिखाती है कि उम्मीद और सही इलाज से जीवन को बचाया जा सकता है।