नारी डेस्क: अगर आप किसी महिला का मेकअप कलेक्शन देखें, तो उसमें न्यूड, रेड, पिंक, ब्राउन, प्लम जैसे ढेरों लिपस्टिक शेड्स मिल जाएंगे। लेकिन हैरानी की बात ये है कि बाहर निकलते वक्त उसके पर्स में लगभग हमेशा वही एक फेवरेट लिपस्टिक रखी होती है। सवाल उठता है जब इतने ऑप्शन हैं, तो फिर सिर्फ एक ही शेड पर भरोसा क्यों? क्या ये सिर्फ आदत है या इसके पीछे दिमाग का कोई गहरा कनेक्शन छुपा है?
कम्फर्ट ज़ोन से जुड़ा है फेवरेट शेड
साइकोलॉजी एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इंसान अनजाने में उन्हीं चीज़ों को चुनता है, जिनसे उसे सुरक्षित और कॉन्फिडेंट महसूस होता है। फेवरेट लिपस्टिक भी उसी कम्फर्ट ज़ोन का हिस्सा होती है। जिस शेड को पहनकर बार-बार तारीफ मिली हो, जो हर आउटफिट के साथ सूट करता हो, दिमाग उसी पर भरोसा करने लगता है। धीरे-धीरे वही रंग “सेफ शेड” बन जाता है।

लिपस्टिक सिर्फ मेकअप नहीं, कॉन्फिडेंस का सहारा
कई महिलाओं के लिए लिपस्टिक सिर्फ एक मेकअप प्रोडक्ट नहीं, बल्कि कॉन्फिडेंस बूस्टर होती है। साइकोलॉजिकल स्टडीज़ बताती हैं कि जिस रंग को पहनकर कोई खुद को स्ट्रॉन्ग, प्रेजेंटेबल या अट्रैक्टिव महसूस करता है, वही शेड बार-बार चुना जाता है। यही वजह है कि चाहे ऑफिस मीटिंग हो या पार्टी, वही लिपस्टिक सबसे पहले पर्स में जगह बनाती है।
यादों और इमोशंस से जुड़ जाता है रंग
अक्सर कोई लिपस्टिक शेड किसी खास पल से जुड़ जाता है पहली डेट, जॉब इंटरव्यू, कोई फेस्टिव डे या यादगार फोटो। साइकोलॉजी में इसे “इमोशनल एंकरिंग” कहा जाता है। दिमाग उस अच्छे अनुभव को उस शेड से जोड़ लेता है, और फिर जब भी वही फीलिंग चाहिए होती है, हाथ उसी लिपस्टिक की ओर बढ़ जाता है।
फैसलों की थकान से बचने का आसान तरीका
आज के दौर में हर चीज़ में ऑप्शंस की भरमार है कपड़े, जूते, मेकअप। हर बार नया फैसला लेना दिमाग को थका देता है, जिसे एक्सपर्ट्स “डिसीजन फैटिग” कहते हैं। ऐसे में फेवरेट लिपस्टिक एक शॉर्टकट की तरह काम करती है ना सोच, ना कन्फ्यूजन, बस वही शेड और काम खत्म।

पर्सनैलिटी भी करती है रिफ्लेक्ट
माना जाता है कि लिपस्टिक का रंग आपकी पर्सनैलिटी को भी दिखाता है। रेड शेड पसंद करने वाली महिलाएं अक्सर कॉन्फिडेंट और बोल्ड मानी जाती हैं। न्यूड शेड्स पसंद करने वाली प्रैक्टिकल और बैलेंस्ड होती हैं, जबकि पिंक शेड्स फ्रेंडली और पॉजिटिव वाइब्स दर्शाते हैं। जब कोई महिला बार-बार एक ही शेड चुनती है, तो वो अपनी पहचान को दोहराती है।
रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कंट्रोल का एहसास
साइकोलॉजिस्ट्स के मुताबिक, छोटी-छोटी चीज़ों पर कंट्रोल महसूस करना इंसान को सुकून देता है। फेवरेट लिपस्टिक उसी कंट्रोल का हिस्सा होती है कम से कम ये तय रहता है कि आज लुक कैसा होगा।
तो क्या बाकी लिपस्टिक बेकार हैं?
बिलकुल नहीं। बाकी शेड्स एक्सपेरिमेंट, मूड और खास मौकों के लिए होते हैं। लेकिन पर्स में जो एक लिपस्टिक रहती है, वो “ऑल टाइम बैकअप” होती है हर हाल में भरोसेमंद।

इसलिए अगली बार अगर आप खुद को या किसी दोस्त को हर शेड होते हुए भी सिर्फ एक लिपस्टिक पर्स में रखते देखें, तो हैरान मत होना। ये सिर्फ आदत नहीं, बल्कि कॉन्फिडेंस, कम्फर्ट, यादों और दिमाग की स्मार्ट प्लानिंग का नतीजा है। आखिर कुछ चीज़ें फेवरेट बन ही जाती हैं और लिपस्टिक भी उन्हीं में से एक है।