नारी डेस्क: आज के समय में वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है और इसका सीधा असर हमारे फेफड़ों पर पड़ रहा है। हम जो हवा हर पल अंदर ले रहे हैं, उसमें धूल, धुआं और कई हानिकारक कण मौजूद होते हैं। यही कारण है कि अब सिर्फ बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि युवा और बच्चे भी सांस से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी है कि हमारे फेफड़े कितने स्वस्थ हैं और उनकी जांच कैसे की जाती है।
फेफड़ों की मजबूती कैसे जांची जाती है?
फेफड़ों की क्षमता और उनकी कार्यक्षमता को जांचने के लिए सबसे आम और भरोसेमंद टेस्ट स्पाइरोमेट्री (Spirometry) है। इसे लंग फंक्शन टेस्ट भी कहा जाता है। इस जांच में व्यक्ति को एक मशीन से जुड़ी ट्यूब में गहरी सांस लेकर पूरी ताकत से बाहर छोड़ना होता है। मशीन यह मापती है कि फेफड़े कितनी हवा अंदर ले सकते हैं और कितनी तेजी से बाहर निकाल सकते हैं।

यह टेस्ट खासतौर पर अस्थमा, सीओपीडी (COPD) और अन्य सांस संबंधी बीमारियों की पहचान करने में मदद करता है। अगर रिपोर्ट सामान्य से कम आती है, तो यह संकेत हो सकता है कि फेफड़ों में रुकावट या कमजोरी है। कुछ मामलों में डॉक्टर पीक फ्लो मीटर टेस्ट या गैस डिफ्यूजन टेस्ट भी कaराने की सलाह देते हैं, ताकि फेफड़ों की स्थिति को और स्पष्ट रूप से समझा जा सके।
किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें?
अक्सर लोग हल्की खांसी या सांस फूलने जैसी समस्याओं को सामान्य समझकर अनदेखा कर देते हैं। लेकिन अगर आपको बार-बार खांसी आती है, सीने में जकड़न रहती है, थोड़ी मेहनत में ही सांस फूल जाती है या बिना कारण थकान महसूस होती है, तो यह कमजोर फेफड़ों के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। समय पर जांच कराने से गंभीर बीमारी को शुरुआती चरण में ही पकड़ा जा सकता है।
फेफड़े कमजोर क्यों हो रहे हैं?
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और बदलती जीवनशैली भी फेफड़ों पर बुरा असर डाल रही है। धूम्रपान और तंबाकू का सेवन फेफड़ों को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है और उनकी क्षमता कम करता है। इसके अलावा, लगातार प्रदूषित हवा में रहना, धूल और धुएं के संपर्क में आना, और शारीरिक गतिविधि की कमी भी फेफड़ों को कमजोर बना देती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी मानता है कि वायु प्रदूषण फेफड़ों की बीमारियों का एक बड़ा कारण है।
फेफड़ों को मजबूत और स्वस्थ कैसे रखें?
फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए सबसे पहला और जरूरी कदम है धूम्रपान से पूरी तरह दूरी बनाना। अगर आप स्मोकिंग करते हैं, तो उसे छोड़ना फेफड़ों के लिए सबसे बड़ा उपहार होगा। नियमित रूप से एरोबिक एक्सरसाइज जैसे तेज चलना, दौड़ना, तैराकी या साइक्लिंग करने से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और सांस लेने की ताकत मजबूत होती है।

गहरी सांस लेने के अभ्यास और प्राणायाम से श्वसन मांसपेशियां मजबूत होती हैं और फेफड़े बेहतर तरीके से काम करते हैं। घर और कार्यस्थल पर स्वच्छ हवा बनाए रखना भी बेहद जरूरी है। कोशिश करें कि धूल और धुएं से बचें, और ज्यादा प्रदूषण वाले क्षेत्रों में मास्क का उपयोग करें।
संतुलित और पौष्टिक आहार भी फेफड़ों की सेहत में अहम भूमिका निभाता है। एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल और सब्जियां जैसे संतरा, बेरीज, पालक और गाजर फेफड़ों की कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद करती हैं। पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है, क्योंकि यह शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने में सहायक होता है।
फेफड़े हमारे शरीर का जीवनदायी अंग हैं, क्योंकि इनके बिना हम सांस नहीं ले सकते। इसलिए उनकी देखभाल करना हमारी जिम्मेदारी है। नियमित जांच, स्वस्थ जीवनशैली और संतुलित आहार अपनाकर हम अपने फेफड़ों को लंबे समय तक मजबूत और स्वस्थ रख सकते हैं। अगर कोई भी असामान्य लक्षण महसूस हो, तो देरी न करें और तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लें।