नारी डेस्क: मशहूर एक्ट्रेस कैथरीन ओ'हारा, जिन्होंने अपनी ज़बरदस्त कॉमिक टाइमिंग से 90 के दशक के बच्चों को दशकों तक हंसाया अब इस दुनिया में नहीं रही। 71 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। ओ'हारा को डेक्सट्रोकार्डिया विद साइटस इन्वर्सस नाम की एक दुर्लभ जन्मजात दिल की बीमारी थी। उनका दिल छाती के दाहिनी ओर था और दूसरे बड़े अंग मिरर-इमेज पोजीशन में थे। इस स्थिति से आम तौर पर कोई मेडिकल समस्या या लक्षण नहीं होते हैं।चलिए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से

क्या है डेक्स्ट्रोकार्डिया (Dextrocardia)?
डेक्स्ट्रोकार्डिया एक दुर्लभ जन्मजात (जन्म से मौजूद) स्थिति है, जिसमें व्यक्ति का दिल सामान्य बाईं ओर होने की बजाय सीने के दाईं ओर होता है। यह स्थिति गर्भावस्था के शुरुआती चरण में भ्रूण के विकास के दौरान बनती है।
डेक्स्ट्रोकार्डिया के प्रकार
डेक्स्ट्रोकार्डिया सिटस इनवर्सस के साथ: इसमें दिल के साथ-साथ शरीर के दूसरे अंग (जैसे लिवर, पेट) भी उलटी दिशा में होते हैं। ऐसे मामलों में कई लोग बिना किसी समस्या के सामान्य जीवन जीते हैं।
आइसोलेटेड डेक्स्ट्रोकार्डिया (केवल दिल दाईं ओर): इसमें दिल दाईं ओर होता है लेकिन बाकी अंग सामान्य जगह पर रहते हैं। इस प्रकार में दिल की संरचनात्मक समस्याओं का खतरा ज़्यादा हो सकता है।

इस बीमारी के लक्षण (Symptoms)
कई लोगों में कोई लक्षण नहीं होते। कुछ मामलों में सांस लेने में तकलीफ, बार-बार फेफड़ों का संक्रमण, नीला पड़ना (ऑक्सीजन की कमी) थकान या दिल की धड़कन अनियमित होना जैसे लक्षण होते हैं। यह एक जीन से जुड़ी या विकासात्मक समस्या है। यह गर्भावस्था में किसी गलती या खान-पान की वजह से नहीं होती। परिवार में इतिहास होने पर जोखिम थोड़ा बढ़ सकता है
कैसे पता चलता है इस बीमारी के बारे में
एक्स-रे, ईसीजी (ECG), इकोकार्डियोग्राफी, सीटी स्कैन या एमआरआई, अक्सर यह स्थिति रूटीन जांच के दौरान संयोग से पता चलती है। अगर कोई समस्या नहीं है, तो इलाज की ज़रूरत नहीं। दिल में जन्मजात दोष होने पर दवाइयां, नियमित कार्डियोलॉजी फॉलो-अप और कुछ मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ती है।
जीवन और सावधानियां
ज़्यादातर लोग सामान्य और स्वस्थ जीवन जीते हैं। डॉक्टर या इमरजेंसी स्टाफ को पहले से बताएं कि दिल दाईं ओर है। मेडिकल टेस्ट (जैसे ECG) करते समय यह जानकारी बहुत ज़रूरी होती है। डेक्स्ट्रोकार्डिया भले ही दुर्लभ हो, लेकिन सही जानकारी, समय पर जांच और ज़रूरत पड़ने पर इलाज से व्यक्ति पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकता है।