
नारी डेस्क: उत्तर भारत में कड़ाके की सर्दी के बीच राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक लावारिस नवजात को दुनिया में आने बाद थमती सांसों के बीच फिर से नया जीवन मिला है। लावारिस इसलिये क्योंकि किसी ने उसे ना जाने किन हालातों में दक्षिणी दिल्ली के एक पार्क में इस हाड़ कंपाती सर्दी में छोड़ दिया था। ग्रेटर कैलाश इलाके के एक पार्मेंक एक दिन का नवजात शिशु स्थानीय लोगों को लावारिस और मरणासन्न हालत में मिला। उसकी हालत बेहद नाजुक जानकर रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) के सदस्यों ने पुलिस को जानकारी दी।
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पुलिस उसे पास स्थित फोटिर्स ला फेम हॉस्पिटल इलाज के लिये ले गयी। जहां चिकित्सकों ने अपनी चिकित्सकीय कौशल से उस मासूम की थमती सांसों को सहारा बनते हुये उसे नया जीवन प्रदान किया। चिकित्सकों के अनुसार भर्ती के समय नवजात की हालत बहुत गंभीर थी। वह गंभीर हाइपोथर्मिया से पीड़ित था। शरीर का तापमान इतना कम हो गया था कि दिल, फेफड़े और दिमाग की गति बेहद कम हो गयी थी। सांस नहीं के बराबर थी, आंखों की पुतलियां फैलने लगी थी। भर्ती के समय बच्चे का वजन 2.14 किलोग्राम था। फोटिर्स ला फेम में इमरजेंसी और नियोनेटल विभाग की टीमों ने इस नवजात को सांस लेने के लिए इंक्यूबेट किया, ऑक्सीजन दिया तथा होश में लाने के लिए सीपीआर भी दिया। इसके अलावा चिकित्सकों की टीम ने उसे आईवी फ्लूइड भी दिया। उसे खून भी चढ़ाया गया, क्योंकि खून की बहुत कमी हो गई थी।
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इंटेंसिव केयर के कुछ ही घंटों में, नवजात बच्चे की हालत स्थिर हो गई। अगले कुछ दिनों में उसकी स्थिति में काफी सुधार हुआ और आखिरकार वह पूरी तरह ठीक हो गया। वह अब स्वस्थ, स्थिर और नई जिंदगी के लिए तैयार है। डॉ. रघुराम मल्लैया ने कहा कि जब बच्चे को अस्पताल लाया गया था तो उसकी हाटर्बीट नहीं थी। लेकिन आज, उसे सामान्य रूप से सांस लेते और रोते देखना किसी चमत्कार से कम नहीं है। डॉ. विशाल गुप्ता ने कहा कि यह केस तत्काल चिकित्सकीय मदद और हमारे क्लिनिकल स्टाफ की लगन की अहमियत को दिखाता है। इमरजेंसी टीम, नर्सों और नियोनेटोलॉजिस्ट की मिलकर की गई कोशिश से बच्चे की जान वापस आ गई।'पाकर् में छोड़े जाने से लेकर देखभाल करके वापस नई जिंदगी दिए जाने तक, बच्चे का जिंदा रहना चिकित्सा की बेहतरीन गुणवत्ता और इंसानियत की बेहतरीन मिसाल है।