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सुधा चंद्रन ने माता की चौकी में 10 मिनट में पीया 4.5 लीटर पानी, बताया– भगवान मुरगन ने दिया थे दर्शन

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 31 Jan, 2026 02:06 PM
सुधा चंद्रन ने माता की चौकी में 10 मिनट में पीया 4.5 लीटर पानी, बताया– भगवान मुरगन ने दिया थे दर्शन

 नारी डेस्क: एक्ट्रेस और डांसर सुधा चंद्रन ने हाल ही में पारस छाबड़ा के पॉडकास्ट ‘आबरा का डाबरा’ में अपने जीवन और करियर से जुड़ी कई अनकही बातें साझा कीं। उन्होंने माता की चौकी, पिता की अंतिम घड़ी और अपने करियर के संघर्षों के बारे में खुलकर बताया।

माता की चौकी और 4.5 लीटर पानी

सुधा ने बताया कि जनवरी की शुरुआत में उनका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह माता की चौकी करती दिखाई गई थीं। वीडियो पर लोगों ने कई तरह की प्रतिक्रियाएं दीं, कुछ ने ओवरएक्टिंग कहा। पॉडकास्ट में सुधा ने बताया कि उस दिन उन्हें इतनी हाई एनर्जी महसूस हुई कि उन्होंने 10 मिनट में 4.5 लीटर पानी पी लिया। उन्होंने मजाक में कहा कि वह पानी के लिए भीख मांग रही थीं। इसके बाद डेढ़ दिन तक उन्हें थकान महसूस हुई।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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माता रानी से कनेक्शन

सुधा ने बताया कि उनके पिता चाहते थे कि हर साल कुल देवी-देवताओं की पूजा जाए, ताकि पितृ दोष न हो। इसी वजह से सुधा और उनके पति रवि ने वैष्णो देवी यात्रा शुरू की। 1995 में शादी के बाद 1997 से वे हर साल यह यात्रा कर रहे हैं। माता की चौकी उन्होंने तब से शुरू की जब मुंबई आने पर उन्होंने इसके बारे में सुना।

सुधा का नाम और डांस करियर

सुधा ने अपने नाम की कहानी बताते हुए कहा कि उनके पिता मुंबई में एक बड़े डांसर के घर टाइपिस्ट की नौकरी करते थे। उन्होंने अपनी बेटी का नाम उस डांसर के नाम ‘सुधा’ पर रखा। डांसर बनने की प्रेरणा भी वहीं से मिली। उन्होंने तेलुगू फिल्म ‘नाचे मयूरी’ से अपने करियर की शुरुआत की और यह उनकी पहली बायोपिक रही।

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भयानक एक्सीडेंट और पैर का नुकसान

सुधा ने अपने करियर में आए सबसे बड़े हादसों में से एक एक्सीडेंट का जिक्र किया। वैष्णो देवी यात्रा के दौरान दो बसों की टक्कर में उनके पैर में गंभीर चोट आई। चोट के कारण पैर का आधा हिस्सा काटना पड़ा। तीन साल के बाद ही उन्होंने आर्टिफिशियल लिम्ब के साथ स्टेज पर डांस किया।

भगवान मुरगन के दर्शन

सुधा ने पिता की अंतिम घड़ी के बारे में बताते हुए कहा कि ICU में जब उनके पिता बीमार थे, तभी उन्हें एक मोर दिखाई दिया। यह वही मोर था जिसे उन्होंने भगवान मुरगन के दर्शन के रूप में माना। कुछ ही मिनटों बाद डॉक्टर आए और पिता की मृत्यु की सूचना दी। सुधा ने कहा कि पिता ने हमेशा कहा था कि जब वे जाएँगे, मुरगन उन्हें लेने आएंगे, और वही हुआ।

सुधा चंद्रन की यह कहानी उनके जीवन, आस्था और संघर्षों का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने दर्शकों को बताया कि कैसे उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी आस्था और हिम्मत बनाए रखी।  

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