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अब दिमाग को बूढ़ा नहीं होने देगी ये एक चीज,  वैज्ञानिकों ने कर दिखाया कमाल

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 17 Feb, 2026 01:43 PM
अब दिमाग को बूढ़ा नहीं होने देगी ये एक चीज,  वैज्ञानिकों ने कर दिखाया कमाल

नारी डेस्क: हमारा दिमाग भी हमारे शरीर के बाकी हिस्सों के साथ बूढ़ा होता है और जैसे-जैसे यह बूढ़ा होता है, यह कम नए ब्रेन सेल्स बनाता है। अब वैज्ञानिकों ने दिमाग की उम्र बढ़ने (Brain Aging) को लेकर एक बड़ी और उम्मीद जगाने वाली खोज की है। रिसर्च में एक खास प्रोटीन की पहचान की गई है, जो न सिर्फ दिमाग की गिरती कार्यक्षमता को धीमा कर सकता है, बल्कि कुछ हद तक ब्रेन एजिंग को रिवर्स करने की क्षमता भी रखता है।


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 ब्रेन एजिंग क्या होती है?

जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, दिमाग में ये बदलाव आने लगते हैं जैसे याददाश्त कमजोर होना, सीखने की क्षमता कम होना, फोकस और निर्णय लेने में दिक्कत,  न्यूरॉन्स (दिमाग की कोशिकाएं) का कमजोर होना। इसी प्रक्रिया को Brain Aging कहा जाता है। रिसर्च में पाया गया कि एक विशेष प्रोटीन  दिमाग की कोशिकाओं को दोबारा एक्टिव करता है, न्यूरॉन्स के बीच कनेक्शन मजबूत करता है  सूजन (Inflammation) को कम करता है, दिमाग की मरम्मत (Repair) प्रक्रिया को तेज करता है। जब यह प्रोटीन शरीर में सही मात्रा में सक्रिय रहता है, तो दिमाग ज्यादा युवा (Young-like) व्यवहार करता है।


 यह प्रोटीन कैसे काम करता है?

सरल शब्दों में यह प्रोटीन ब्रेन सेल्स को सुरक्षा कवच देता है। उम्र के साथ जो सेल्स सुस्त हो जाती हैं, उन्हें दोबारा ऊर्जा देता है। दिमाग में खून के प्रवाह और ऑक्सीजन सप्लाई को बेहतर बनाता है। इसी वजह से वैज्ञानिक मानते हैं कि यह अल्जाइमर, डिमेंशिया और याददाश्त से जुड़ी बीमारियों  में भविष्य में मददगार हो सकता है।
 

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क्या इसका इलाज जल्द आएगा?

अभी यह रिसर्च जानवरों और लैब स्टडी तक सीमित है।  इंसानों पर ट्रायल होना बाकी है लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले वर्षों में दवाइयों, इंजेक्शन या जीन थेरेपी के जरिए इस प्रोटीन को टारगेट किया जा सकता है।यह कोई जादुई इलाज नहीं है, लेकिन हेल्दी लाइफस्टाइल, अच्छी नींद, संतुलित आहार, मानसिक एक्टिविटी के साथ मिलकर यह खोज भविष्य में ब्रेन हेल्थ के लिए क्रांतिकारी साबित हो सकती है।


निष्कर्ष

वैज्ञानिकों की यह खोज बताती है कि दिमाग का बूढ़ा होना अंतिम सच नहीं है। सही रिसर्च और तकनीक के साथ, भविष्य में ब्रेन को जवान बनाए रखना संभव हो सकता है।

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