नारी डेस्क: गर्भावस्था दुनिया के सबसे खूबसूरत पलों में से एक है, जब मां अपने बच्चे के जन्म का इंतजार कर रही होती है। लेकिन हाल की रिसर्च ने बताया है कि इस दौरान महिलाओं में हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मामलों में इजाफा हुआ है। पहले यह माना जाता था कि गर्भवती महिलाओं को दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है, लेकिन अब आंकड़े यह सोच बदलने पर मजबूर कर रहे हैं।
हार्ट अटैक के आंकड़े
2023 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर 1 लाख महिलाओं में से 88 की मौत डिलीवरी या प्रेग्नेंसी की जटिलताओं के कारण हुई। पूरे साल का हिसाब जोड़ें तो यह संख्या लगभग 22,500 हो जाती है। अगर हार्ट अटैक की बात करें तो प्रति 1 लाख डिलीवरी में 3 महिलाओं में हार्ट अटैक का मामला देखा गया। हालांकि यह संख्या कम लग सकती है, लेकिन पहले ऐसे मामले लगभग सामने नहीं आते थे।
हर 100 गर्भवती महिलाओं में से लगभग 1 से 4 को किसी न किसी दिल संबंधी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, 1 लाख डिलीवरी में करीब 3 महिलाओं को एक्यूट मायोकार्डियल इंफार्क्शन (सिंयर हार्ट अटैक) का खतरा होता है। ऐसे मामलों में मां और बच्चे दोनों के लिए जोखिम बढ़ जाता है, जिससे बच्चे की वृद्धि प्रभावित हो सकती है या समय से पहले प्रसव का खतरा बढ़ सकता है।

हार्ट अटैक की वजहें
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि प्रेग्नेंसी में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों के पीछे महिलाओं की बदलती जीवनशैली और उम्र से जुड़े जोखिम हैं।
उम्र: 35 साल के बाद गर्भधारण करने वाली महिलाओं में दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
जीवनशैली और स्वास्थ्य: डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, कम फिजिकल एक्टिविटी और IVF जैसी वजहें शरीर को कमजोर बनाती हैं।
शरीर पर अतिरिक्त दबाव: गर्भावस्था में शरीर में खून की मात्रा बढ़ जाती है। हार्ट को भ्रूण की जरूरतों के अनुसार अधिक खून पंप करना पड़ता है, जिससे दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
इन सभी कारणों से प्रेग्नेंसी में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
हार्ट अटैक के साइलेंट लक्षण
गर्भावस्था में हार्ट अटैक के लक्षण हमेशा स्पष्ट नहीं होते। आमतौर पर यह संकेत दिख सकते हैं

सांस फूलना
असामान्य थकान
चक्कर या बेहोशी
मतली या उल्टी
बहुत पसीना आना
ऊपरी पेट या पीठ में दर्द
कई बार महिलाएं इन्हें सामान्य प्रेग्नेंसी की परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन ऐसे किसी भी लक्षण को अकसर हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी है।
सावधानियां और हेल्थ टिप्स
रेगुलर चेकअप: प्रेग्नेंसी के दौरान नियमित रूप से कार्डियक और प्रेग्नेंसी चेकअप कराएं।
स्वस्थ जीवनशैली: हेल्दी डाइट, नियमित हल्की एक्सरसाइज और पर्याप्त नींद लें।
खतरनाक संकेतों पर ध्यान दें: अगर सांस लेने में दिक्कत, चक्कर, तेज पसीना या पेट में असामान्य दर्द हो, तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
मेडिकल हिस्ट्री: अगर पहले से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या हार्ट की समस्या है, तो प्रेग्नेंसी शुरू होने से पहले और दौरान डॉक्टर से सलाह लें।

तनाव कम करें: मानसिक तनाव भी हार्ट पर दबाव डालता है। ध्यान, योग और हल्की शारीरिक गतिविधि मददगार होती है।
गर्भावस्था का समय खूबसूरत है, लेकिन स्वास्थ्य को हल्के में नहीं लेना चाहिए। विशेषकर 35 साल के बाद प्रेग्नेंसी में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। इसके लिए साइलेंट लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय पर चिकित्सकीय मदद लें। सही देखभाल और सतर्कता से मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।