नारी डेस्क: आजकल बच्चों में चिड़चिड़ापन और गुस्सा बढ़ने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, और इसके पीछे मुख्य वजह है ज्यादा मीठा और प्रोसेस्ड फूड। चॉकलेट, टॉफी, कुकीज और कोल्ड ड्रिंक जैसी चीजें बच्चों को अस्थायी रूप से खुश और हाइपरएक्टिव तो बना देती हैं, लेकिन बाद में ब्लड शुगर गिरने के कारण वे जल्दी चिड़चिड़े और गुस्सैल हो जाते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बच्चों को मीठा खिलाने से पहले डॉक्टर या न्यूट्रिशन एक्सपर्ट की सलाह लेना जरूरी है, ताकि उनके स्वास्थ्य और व्यवहार पर नकारात्मक असर न पड़े।
चीनी कैसे बन रही बच्चों के लिए खतरा
जब बच्चे टॉफी या चॉकलेट खाते हैं तो उनके दिमाग में डोपामाइन हार्मोन रिलीज होता है, जिससे वह कुछ समय के लिए हाइपर एक्टिव और खुश दिखते हैं। लेकिन जैसे ही ब्लड शुगर का स्तर तेजी से गिरता है, बच्चा अचानक चिड़चिड़ा और गुस्सैल हो जाता है। पिछले दस साल में बच्चों को आसानी से प्रोसेस्ड फूड उपलब्ध होने के कारण ऐसे मामले बढ़े हैं। इसके अलावा, ज्यादा चीनी का सेवन मोटापे का कारण भी बन रहा है।

पैरेंट्स की मुश्किलें और उदाहरण
क्लास में नहीं टिक पाना: आठ साल के एक बच्चे की स्कूल से शिकायत आती थी कि वह क्लास में ध्यान नहीं दे पा रहा। जांच में पता चला कि वह रोज कुकीज, चॉकलेट और पेस्ट्री खाता था। जैसे ही रिफाइंड शुगर कम की गई, बच्चा अधिक शांत और फोकस्ड हो गया।
बचपन में मोटापा और चिड़चिड़ापन: 12 साल की एक बच्ची का वजन 75 किलो हो गया। इसके पीछे कारण था अधिक कोल्ड ड्रिंक, बिस्किट और पेस्ट्री का सेवन। धीरे-धीरे उसका स्वभाव भी चिड़चिड़ा होने लगा। डॉक्टरों ने इसकी मुख्य वजह अत्यधिक चीनी को बताया।
कैसे करें मीठे का सही सेवन
एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स के अनुसार बच्चों को एकदम मीठा बंद करने की बजाय धीरे-धीरे कम करना चाहिए। इसके लिए कुछ आसान उपाय हैं
नेचुरल शुगर अपनाएं: रिफाइंड शुगर की जगह फल, खजूर, गुड़ दें।
फलों को प्राथमिकता दें: बच्चों के सामने खुद ताजा फलों का जूस पीएं और घर में हमेशा फल की बास्केट रखें। भूख लगने पर बच्चे फल ही खाएं।
हेल्दी स्नैक्स: चॉकलेट की बजाय नट्स और होममेड हेल्दी विकल्प दें।

स्कूल में हेल्दी विकल्प: बच्चों को स्कूल कैंटीन में भी स्वस्थ विकल्प उपलब्ध कराना जरूरी है।
इन उपायों से न केवल बच्चों की चिड़चिड़ाहट कम होगी, बल्कि उनका स्वास्थ्य और वजन नियंत्रित रहेगा।