नारी डेस्क : पेट में छोटे-छोटे घाव या छाले जिन्हें पेप्टिक अल्सर कहा जाता है, अक्सर अल्ट्रासाउंड जैसी जांच में भी पकड़ में नहीं आते। इसे आम भाषा में गैस्ट्रिक अल्सर के नाम से भी जाना जाता है। शुरुआती अवस्था में इसके लक्षण हल्के होते हैं और पहचान मुश्किल होती है। लेकिन अगर समय पर इलाज न किया जाए तो यह गंभीर समस्या में बदल सकती है और कई मामलों में कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।
पेट में अल्सर के लक्षण
नाभि के ऊपर या ऊपरी पेट में दर्द और जलन
खाली पेट या खाने के बाद दर्द बढ़ना
गैस, अपच, उल्टी और मतली
पेट में सूजन और एसिड रिफ्लक्स (खट्टी डकारें)
एनीमिया और जल्दी थकान
सांस लेने में दिक्कत
मल का रंग काला होना या कब्ज
यदि ये लक्षण लगातार बने रहें तो इन्हें अनदेखा करना खतरनाक हो सकता है।

पेट में अल्सर के मुख्य कारण
नॉनस्टेरॉयडल एंटी-इन्फ्लेमेटरी दवाइयों का अधिक सेवन
हेलिकोबैक्टर पाइलोरी बैक्टीरिया का संक्रमण
बुखार, खांसी या जुकाम के दौरान बिना डॉक्टर की सलाह के बार-बार एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन
विशेषज्ञों के अनुसार, इन कारणों से पेट में अल्सर होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
अल्सर में क्या खाएं और क्या बचें
अल्सर में क्या न खाएं
चाय, कॉफी, कुकीज, रिफाइंड तेल
खट्टी चीजें, प्रोसैस्ड फूड्स, मस्टर्ड सीड्स, टमाटर, जायफल
बहुत गर्म या बहुत ठंडी चीजें।

अल्सर में क्या खाएं
रेगुलर दही और प्रोबायोटिक फूड्स
सेब, लौकी, तोरी, गाजर, ब्रोकली, गोभी
फर्मेंटेड फूड और चोकर युक्त आटे के उत्पाद
सही डाइट पेट के अल्सर को नियंत्रित करने में मदद करती है।
गंभीर लक्षण जिन पर तुरंत ध्यान दें
तेजी से वजन घटना और भूख कम लगना
पेट में लगातार जलन और दर्द
मल में खून या मल का गहरा रंग
लगातार एसिड रिफ्लक्स
ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

गैस्ट्रोलॉजिस्ट का कहना है कि पेट में अल्सर को हल्के में लेना खतरनाक है। शुरुआती लक्षणों की पहचान और समय पर इलाज ही इसे नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी तरीका है।