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इन चीजों का दान करेंगे तो खुद हो जाओगे कंगाल!

  • Edited By neetu,
  • Updated: 16 Sep, 2020 09:41 AM
इन चीजों का दान करेंगे तो खुद हो जाओगे कंगाल!

हर धर्म में दान- पुण्य का विशेष महत्व होता है। गरीबों व जरूरतमंदों को दान देने से देवी-देवताओं की कृपा मिलने के साथ आर्थिक परेशानियां दूर हो तरक्की के रास्ते खुलते है। घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने के साथ सुख- शांति व समृद्धि आती है। मगर वास्तु और ज्योतिषशास्त्र के अनुसार,  दान करने के दौरान कुछ चीजों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। नहीं तो लाभ की जगह हानि का सामना करना पड़ सकता है। तो चलिए जानते हैं दान देने से जुड़ी कुछ खास बातें...

झाड़ू का दान

कभी गलती से भी किसी को झाड़ू दान स्वरूप देने की गलती न करें। मान्यता है यह महालक्ष्मी को अतिप्रिय होता है। ऐसे में इसे देवी लक्ष्मी का प्रतीक कहा जाता है। इसलिए इसे दान में देने से मां लक्ष्मी के नाराज होने से आर्थिक परेशानियां झेलनी पड़ सकती है। ‌

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शनिवार के दिन तेल का दान

मान्यता है कि शनिवार के दिन तेल का दान करने से न्याय के देवता शनिदेव प्रसन्न होते हैं। मगर उन्हें हमेशा नया और साफ तेल ही चढ़ाना चाहिए। भूल से भी घर पर इस्तेमाल होने वाला तेल नहीं चढ़ाना चाहिए। नहीं तो शनि देवता की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है। 

नुकीली चीजों का दान

कभी भी किसी को नुकीली चीजें जैसे कि चाकू, तलवार, कैंची आदि नहीं देनी चाहिए। ऐसी नुकीली व धारधारी चीजों का दान करने से जीवन में दुर्भाग्य का सामना करना पड़ सकता है। व्यक्ति के तरक्की के रास्ते में रूकावटें आने के साथ जीवन में परेशानियों से घिर सकता है। 

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भूखे को बासी भोजन खिलाना

किसी की भूख शांत करना दुनिया में सबसे बड़ा पुण्य का काम माना जाता है। मगर कभी भी किसी को बासी खाना नहीं खिलाना चाहिए। ऐसा करने से धन की देवी लक्ष्मी जी की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है।

कटी- फटी किताबों का दान

हिंदू धर्म में विद्या दान सब दानों में सबसे बड़ा कहा जाता है। जैसे कहा ही ज्ञान सब के साथ बांटने में इसमें और भी वृद्धि होती है। मगर किसी को किताबें व कॉपियां दान करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि ये कहीं से फटी हुई न हो। हमेशा नई और साफ पुस्तकों का दान करें। साथ ही अगर आप किसी को धार्मिक किताब या ग्रंथ देना चाहते है तो पहले इस बात को सुनिश्चित कर लें कि सामने वाले को उसमें रूचि है या नहीं। ऐसे में धार्मिक पुस्तकों का निरादर होने से देवी-देवताओं के नाराज होने का कारण बनती है। इससे जीवन में परेशानियां हो सकती है।

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