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महिलाओं के लिए प्ररेणा है कस्तूरबा बाई, उनके जीवन से लें ये 3 सीख

  • Edited By khushboo aggarwal,
  • Updated: 09 Jul, 2019 12:25 PM
महिलाओं के लिए प्ररेणा है कस्तूरबा बाई, उनके जीवन से लें ये 3 सीख

जिदंगी में पढ़ाई लिखाई के अपने मायने होते है, लेकिन उससे भी ज्यादा मायने खुद हर आत्मविश्वास के होते है। उस शिक्षा का क्या फायदा जो आपको आत्मविश्वास न दिला सकें। कई बार कम शिक्षा के बाद भी एक महिला में इतना आत्मविश्वास होता है कि दुनिया की कोई भी चीज उसके लिए छोटी होती हैं। पिछले कुछ सालों से हमारे देश की महिलाओं की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। देश में वर्किंग महिलाओं की संख्या में काफी वृद्धि हुई है वहीं हाउस वाइव्स के रहन सहन में भी काफी सुधार हुआ हैं। फिर भी महिलाओं को अपने स्वतंत्रता के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता हैं। 
आज की महिलाओं के लिए कस्तूरबा गांधी न केवल एक उदाहरण है बल्कि उनके गुणों से आज की महिलाओं को प्रेरणा लेनी चाहिए। उनके जीवन से जुड़े कुछ किस्सों से महिलाओं को अपने जीवन में बदलाव ला कर खुद का सम्मान योग्य स्थान हासिल कर सकती है। 

समझाएं अपनी अहमियत 

महिलाओं को अपने जीवन साथी व परिवार के सदस्यों को अपनी अहमियत खुद ही समझानी पड़ती हैं। जब तक परिवार के सदस्यों को आपकी अहमियत नहीं समझ नही आएगी तब तक वह आपको खुद से कमजोर ही पाएंगे। 
जब महात्मा गांधी बैरिस्टरी की पढ़ाई करके लौटे थे, तो वह कस्तूरबा को अंग्रेजी सीखाना चाहते थे, पर कस्तूरबा को यह परिवर्तन स्वीकार नही था,  कोशिश करने के बाद भी वह सीख न सकी। तब गांधी जी ने उन्हें बुद्धिहीन कहा तो उऩ्होंने कहा कि अगर आप मेरे साथ मेल नहीं बिठा रहे तो घर बार संभाल लें। उसके बाद खुद मायके चली गई। उसके बाद उनकी गृहस्थी ठप्प हो गई। तब गांधी को जी उनकी अहमियत समझ आई। 

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पहले खुद को समझे फिर बाकियों की सुने 

अकसर एक महिला को यही सिखाया जाता है कि महिलाओं को अपने पति व परिवार की बात माननी चाहिए। लेकिन उनकी हर बात को मानने से पहले खुद को समझना बहुत ही जरुरी होता है। किसी भी बात को अपनाने से पहले अपनी तरह से समझे फिर उस पर अमल करें। 
 गांधी जी के कहने पर कस्तूरबा ने गहने पहने छोड़ दिए थे, पर लाल चूड़ियां पहनी नहीं छोड़ी।गांधी जी के कई बार कहने के बाद भी उन्होंने यह बात नहीं मानी। वह हमेशा गांधी जी के प्रयोगों को पहले अपनी तरह समझती फिर उन्हें अपनाने के बारे में फैसला करती। उनके लिए लाल चूड़ियों का मतलब पति की लंबी आयु था, इसलिए वह उन्हें अपने विश्वास के साथ सारी जिदंगी पहने रखना चाहती थी। 

बने धैर्यवान व कोमल ह्दय 

शादीशुदा जिदंगी में पति व पत्नी दोनों गलती हो जाती है। अगर आपकी किसी गलती के लिए पति आपको डांटते है तो उस पर गुस्सा होने की जगह शांति रहे। अपनी गलती को मान कर धैर्य से काम लें।    आश्रम में रहते हुए गांधी जी की ओर से कुछ नियम बनाए गए थे। एक बार कस्तूरबा से एक नियम टूट गया। उस समय गांधी जी ने भरी प्रार्थना में उन्हें उनकी गलती का एहसास करवाया। तब एक महिला ने सहानुभूति दिखाते हुए पत्र लिखा कि गांधी जी को आपको सार्वजनिक तौर पर डांटना नही चाहिए। तब उन्होंने जवाब दिया कि मुझसे भूल हो गई और उऩ्होंने इस बारे में मुझे बता दिया। हमारी गृहस्थी में सब चीजें सार्वजनिक हैं। जो होता है सबके सामने होता है। क्या घर में ऐसी गलतियां नहीं होती हैं।

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