नारी डेस्क: पहले हाई ब्लड प्रेशर यानी ब्लड प्रेशर की समस्या सिर्फ बड़े लोगों में देखा जाता था, लेकिन अब यह बच्चों में भी तेजी से बढ़ रही है। यूके जैसे देशों में बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर के मामले पिछले कुछ सालों में दोगुने हो गए हैं। डॉक्टर इसे “साइलेंट किलर” कहते हैं, क्योंकि शुरुआती दौर में इसके कोई साफ लक्षण नजर नहीं आते।
बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर के शुरुआती संकेत
हाई ब्लड प्रेशर की सबसे खतरनाक बात यह है कि बच्चे शुरुआत में इसे महसूस ही नहीं कर पाते। हालांकि कुछ बच्चों में सिरदर्द, थकान, कमजोरी, चक्कर आना जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं। अगर समय रहते इसे पहचान कर इलाज न किया जाए, तो यह दिल, किडनी, मस्तिष्क और आंखों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है।

मोटापा और जंक फूड हैं मुख्य कारण
2010 से 2020 के बीच बच्चों में मोटापे के मामले दोगुने हो गए हैं। हर पांच में से एक बच्चा मोटापे की चपेट में है। प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड में ज्यादा नमक, फैट और शुगर होता है, जो बच्चों के दिल और नसों पर बुरा असर डालता है। 10 साल की उम्र के बाद पेट की चर्बी बढ़ने से शरीर में ऐसे केमिकल बनने लगते हैं, जो नसों को सख्त कर देते हैं और दिल पर दबाव बढ़ाते हैं।
लाइफस्टाइल और स्क्रीन टाइम भी बढ़ा रहे खतरा
जो बच्चे कम सब्जियां खाते हैं और दिन में दो घंटे से ज्यादा मोबाइल, टीवी या कंप्यूटर पर समय बिताते हैं, उनमें हाई ब्लड प्रेशर का खतरा ज्यादा है। जिन बच्चों के परिवार में पहले से यह बीमारी रही है, उनमें जोखिम और बढ़ जाता है। समय से पहले जन्म लेने वाले या कम वजन वाले बच्चों में भी भविष्य में यह समस्या देखी जा सकती है।
हाई ब्लड प्रेशर के प्रकार
स्कूल जाने वाले बच्चों में प्राइमरी हाइपरटेंशन यानी लाइफस्टाइल से जुड़ा हाई ब्लड प्रेशर सबसे आम हो गया है। छोटे बच्चों में किडनी, थायराइड या जन्मजात दिल की बीमारियां इसकी वजह बन सकती हैं, जो कई बार समय पर पकड़ में नहीं आती।

क्या होता है बच्चों के शरीर में?
डॉक्टरों के अनुसार, 12 साल की उम्र तक बच्चों के दिल की मांसपेशियां मोटी होने लगती हैं। किशोरावस्था में धमनियों में प्लाक जमना शुरू हो सकता है, जिससे आगे चलकर स्ट्रोक और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
कैसे बचाएं बच्चों को हाई ब्लड प्रेशर से
अच्छी बात यह है कि अगर शुरुआती चरण में ही हाई ब्लड प्रेशर पकड़ में आ जाए, तो इसके नुकसान को पलटा जा सकता है। इसके लिए
खानपान में सुधार – जंक फूड, पैकेज्ड फूड और ज्यादा नमक से दूर रहें।
नियमित खेलकूद और एक्सरसाइज – दिन में बच्चों को सक्रिय रखें।
फ्रूट और हेल्दी फूड की आदत डालें – स्कूलों में फल वितरण जैसी योजनाएं मददगार हैं।

मेडिकल चेकअप – जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लें और समय पर इलाज कराएं।
माता-पिता की भूमिका – बच्चों की आदतें बदलने में माता-पिता की भूमिका सबसे अहम है।
आज के समय में हाई ब्लड प्रेशर सिर्फ बड़ों की बीमारी नहीं है, बच्चों में भी यह बढ़ता जा रहा है। सही खानपान, नियमित खेलकूद और समय पर मेडिकल चेकअप से बच्चों को इस खतरे से बचाया जा सकता है।