
नारी डेस्क: अक्सर लोग नाक पर दिखने वाले छोटे-छोटे काले डॉट्स को ब्लैकहेड्स समझ लेते हैं और उन्हें निकालने के लिए स्क्रब, स्ट्रिप्स या नाखून तक का इस्तेमाल करने लगते हैं। लेकिन डर्मेटोलॉजिस्ट का कहना है कि ये हमेशा ब्लैकहेड्स नहीं होते। दरअसल, ज़्यादातर मामलों में ये बेशियस फिलामेंट्स (Sebaceous Filaments) होते हैं।

सेबेशियस फिलामेंट्स क्या होते हैं?
ये नाक की स्किन में मौजूद नेचुरल ऑयल (सीबम) और डेड स्किन सेल्स का मिश्रण होते हैं। ये पोर्स को अंदर से लाइन करते हैं। इनका काम स्किन को मॉइश्चराइज रखना होता है। हवा के संपर्क में आने पर ये काले या ग्रे रंग के दिखने लगते हैं, जिससे लोग इन्हें ब्लैकहेड्स समझ लेते हैं।
ब्लैकहेड्स और सेबेशियस फिलामेंट्स में फर्क
ब्लैकहेड्स सेबेशियस फिलामेंट्स
पोर्स ब्लॉक हो जाते हैं पोर्स खुले रहते हैं
उभरे हुए और सख्त होते हैं फ्लैट और हल्के दिखते हैं
एक्ने की समस्या का हिस्सा स्किन की सामान्य संरचना
हटाने की ज़रूरत होती है पूरी तरह हटाना संभव नहीं

इन्हें जबरदस्ती निकालना क्यों नुकसानदेह है?
ऐसा करने से पोर्स बड़े हो सकते हैं। स्किन में जलन और रेडनेस हो सकती है। इससे इंफेक्शन और पिंपल्स का खतरा बढ़ता है। कुछ ही दिनों में ये फिर वापस दिखने लगते हैं
डर्मेटोलॉजिस्ट की सलाह: सही केयर कैसे करें
माइल्ड क्लींजिंग: दिन में 2 बार जेंटल फेसवॉश से चेहरा साफ करें।
सैलिसिलिक एसिड का इस्तेमाल: यह पोर्स के अंदर जमा ऑयल को साफ करने में मदद करता है।
रेगुलर लेकिन लिमिटेड एक्सफोलिएशन: हफ्ते में 1–2 बार से ज्यादा नहीं।
क्ले मास्क: हफ्ते में 1 बार क्ले मास्क लगाने से एक्स्ट्रा ऑयल कंट्रोल होता है।
नॉन-कॉमेडोजेनिक मॉइश्चराइजर: ऑयली स्किन में भी मॉइश्चराइजर जरूरी है।
कब डॉक्टर से मिलें?
अगर नाक पर पिंपल्स बढ़ने लगें, बार-बार इंफ्लेमेशन हो स्किन बहुत ज्यादा ऑयली या सेंसिटिव हो तो डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह लेना बेहतर है। इन्हें हटाने के बजाय सही स्किनकेयर रूटीन अपनाना ही सबसे सुरक्षित और असरदार तरीका है।