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होली पर भद्रा और ग्रहण का साया,  तारीख को लेकर अपनी कंफ्यूजन करें दूर

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 07 Feb, 2026 07:25 PM
होली पर भद्रा और ग्रहण का साया,  तारीख को लेकर अपनी कंफ्यूजन करें दूर

नारी डेस्क: त्योहारों की अलग- अलग तारीखों को लेकर हर बार कंफ्यूजन हो जाती है। इस बार होली को लेकर भी लोग असमंजस में है, जिसका कारण है  चंद्र ग्रहण। वैसे तो पूर्णिमा तिथि के दिन होलिका दहन होता है और फिर अगले दिन रंगों से होली खेली जाती है, लेकिन इस बार  होली के दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण भी लगने जा रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि होली ग्रहण के बीच मनाई जाएगी या नहीं। आइए दूर करते हैं आपकी ये कंफ्यूजन।


ये है चंद्र ग्रहण का समय

न का पूजन या जाता है।  चंद्र ग्रहण 3 मार्च को दोपहर 2 बजकर 26 मिनट पर शुरू होगा और शाम को 6 बजकर 24 मिनट पर समाप्त होगा। इस दौरान सूतक काल लगने के चलते कोई शुभ कार्य नहीं किया जा सकता। ज्येतिष के जानकारों को मानना है कि  दो मार्च को पूर्णिमा तिथि शाम 05:18 बजे से शुरू होकर तीन मार्च को शाम 04:33 बजे तक रहेगी। भद्रा दो मार्च से सांयकाल 05:18 से प्रात: 4:56 बजे तक रहेगी। होलिका का दहन दो मार्च को भद्रा पुच्छ में रात 12:50 बजे से 02:02 बजे तक अथवा भद्रा समाप्त होने के बाद सुबह 4:56 बजे के बाद भद्रारहित काल में भी होलिका दहन कर सकते हैं। 


 4 मार्च को मनाई जाएगी रंगों की होली

ग्रहण समाप्त होने के बाद अगले दिन यानी 4 मार्च 2026 को चैत्र कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि होगी जो रंगों की होली मनाने के लिए पूरी तरह शुभ मानी जा रही है। इसलिए पूरे भारत में होली 4 मार्च को मनाई जाएगी। ज्योतिष के अनुसार, ग्रहण से पहले शुरू होने वाले सूतक काल में पूजा-पाठ, शुभ कार्य और धार्मिक अनुष्ठान करना उचित नहीं माना जाता है, इसलिए इस दौरान विशेष सावधानी बरतं और ग्रहण समाप्त होने के बाद ही पूजा-अर्चना करें। 

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