नारी डेस्क : डायबिटीज सिर्फ ब्लड शुगर बढ़ने की बीमारी नहीं है, बल्कि यह धीरे-धीरे शरीर की नसों, धमनियों और अंगों को नुकसान पहुंचाती है। खासकर अगर मरीज रोजमर्रा की कुछ आम लेकिन खतरनाक गलतियां करता रहे, तो नर्व डैमेज (Diabetic Neuropathy), ब्लॉकेज और पैरों में अल्सर का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि डायबिटीज एक-दो दिन में नसों को खराब नहीं करती, बल्कि गलत आदतें सालों में नुकसान करती हैं। आइए जानते हैं वे 5 बड़ी गलतियां, जो डायबिटीज में नसों को डैमेज कर देती हैं।
सिर्फ शुगर के नंबर पर ध्यान देना
अक्सर मरीज यह मान लेते हैं कि अगर फास्टिंग शुगर या HbA1c ठीक है, तो सब कुछ सुरक्षित है।
इंसुलिन रेजिस्टेंस
सूजन (Inflammation)
लिपिड डैमेज
ये सब अंदर-ही-अंदर बढ़ता रहता है, जिससे नसें और धमनियां कमजोर होने लगती हैं। सिर्फ शुगर का आंकड़ा ठीक होना काफी नहीं है।

ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नजरअंदाज करना
डायबिटीज के साथ अगर
हाई ब्लड प्रेशर
हाई कोलेस्ट्रॉल
भी मौजूद हो, तो यह धमनियों के लिए बहुत खतरनाक कॉम्बिनेशन बन जाता है।
ऐसे में सिर्फ शुगर कंट्रोल करना नसों को बचाने के लिए पर्याप्त नहीं होता।
कम चलना या बिल्कुल न चलना
पैरों में दर्द, झनझनाहट या थकान के कारण कई डायबिटीज मरीज चलना कम कर देते हैं।
कम चलने से ब्लड सर्कुलेशन खराब होता है
पैरों की नसों को ऑक्सीजन कम मिलती है
नर्व डैमेज तेजी से बढ़ता है
हल्की-फुल्की वॉक भी नसों के लिए बेहद जरूरी है।

पैरों की देखभाल न करना
डायबिटीज मरीजों की एक बड़ी गलती यह होती है कि
जब तक घाव या अल्सर न बन जाए
तब तक पैरों पर ध्यान नहीं देते
जबकि शुरुआती लक्षण पहले ही दिखने लगते हैं।
जैसे, पैरों का सुन्न होना
त्वचा का रंग बदलना
जलन या झनझनाहट
समय रहते ध्यान न देने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।
लक्षणों का इलाज करना, लाइफस्टाइल नहीं बदलना
कई मरीज दवाइयों से लक्षण तो दबा लेते हैं,
लेकिन कम नींद लेना
खराब खान-पान
घंटों बैठे रहना
जैसी आदतें नहीं छोड़ते।
डॉक्टरों के मुताबिक, लाइफस्टाइल में सुधार किए बिना नसों को बचाना मुश्किल है।

डायबिटीज सिर्फ शुगर नहीं, पूरी बॉडी की बीमारी है
डायबिटीज का असर दिल, दिमाग, किडनी और पैरों की नसों पर भी पड़ता है। इसलिए वैस्कुलर डैमेज को धीमा करने के लिए सिर्फ एक बार जांच करवाना काफी नहीं है।
डॉक्टर की सलाह
रेग्यूलर वैस्कुलर स्क्रीनिंग कराएं।
दर्द शुरू होने का इंतजार न करें।
ब्लॉकेज शुरुआती स्टेज में ही पकड़ लें।
कुछ सिंपल टेस्ट से समय रहते खतरे को पहचाना जा सकता है।