नारी डेस्क: जन्म के समय कई बच्चों के शरीर पर अलग-अलग निशान दिखाई देते हैं, जिन्हें बर्थ मार्क कहा जाता है। ये निशान हल्के गुलाबी, लाल, भूरे या काले रंग के हो सकते हैं और शरीर के किसी भी हिस्से पर दिख सकते हैं। कुछ निशान छोटे होते हैं और समय के साथ हल्के हो जाते हैं, जबकि कुछ लंबे समय तक बने रहते हैं। आमतौर पर बर्थ मार्क नुकसानदायक नहीं होते, लेकिन इन्हें लेकर कई मिथक और गलत धारणाएं आज भी समाज में मौजूद हैं।
प्रेग्नेंसी में फूल सूंघना और बर्थ मार्क – मिथक या सच?
एक आम धारणा यह है कि अगर गर्भावस्था में महिला फूल या किसी खास चीज की खुशबू लेती है तो बच्चे के शरीर पर बर्थ मार्क बन सकते हैं। हालांकि, वरिष्ठ सलाहकार स्त्री रोग विशेषज्ञ के अनुसार यह पूरी तरह से मिथक है। बर्थ मार्क किसी बाहरी चीज़, जैसे फूल सूंघना, खाने-पीने की आदत या दृश्य अनुभव से नहीं बनते। डॉक्टर और वैज्ञानिक स्पष्ट रूप से कहते हैं कि गर्भावस्था में मां के व्यवहार का बच्चे के शरीर पर बर्थ मार्क से कोई संबंध नहीं है।

बर्थ मार्क क्यों बनते हैं?
बर्थ मार्क मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं
पिगमेंटेड बर्थ मार्क – यह त्वचा में रंग देने वाले सेल्स (मेलनिन) के अधिक बनने से बनते हैं। जब ये सेल्स एक जगह ज्यादा जमा हो जाते हैं, तो निशान गहरा दिखता है।
वैस्कुलर बर्थ मार्क – यह खून की नसों के सही तरीके से विकसित न होने के कारण बनते हैं। इस प्रकार के बर्थ मार्क त्वचा पर लाल या गुलाबी रंग के निशान के रूप में दिखाई देते हैं।
मिथक और समाज में बनी गलत धारणाएं
पहले के समय में लोगों के पास सही मेडिकल जानकारी नहीं थी। जब बच्चे के शरीर पर निशान दिखाई देते थे, तो उसे किसी घटना या आदत से जोड़ दिया जाता था। जैसे कि मां ने प्रेग्नेंसी में फूल सूंघा या कुछ खास देखा, तो माना जाता था कि इसी वजह से बच्चे पर निशान बन गए। यह सोच धीरे-धीरे समाज में मिथक बन गई।

जेनेटिक कारण भी हो सकते हैं
कुछ मामलों में बर्थ मार्क का संबंध जेनेटिक कारणों से भी होता है। अगर परिवार में किसी को बर्थ मार्क रहे हैं, तो बच्चे में भी दिख सकते हैं। हालांकि, यह हर बार जरूरी नहीं है। कई बच्चों में बिना पारिवारिक इतिहास के भी बर्थ मार्क दिखाई देते हैं। हर बच्चे में बर्थ मार्क का आकार, रंग और प्रकार अलग-अलग हो सकता है।
बर्थ मार्क हटाया जा सकता है?
अधिकतर बर्थ मार्क सुरक्षित होते हैं और इलाज की जरूरत नहीं होती। समय के साथ कुछ निशान अपने आप हल्के हो जाते हैं। खासकर बच्चों में कई वैस्कुलर बर्थ मार्क उम्र बढ़ने के साथ धीरे-धीरे कम हो जाते हैं। हालांकि, यदि कोई निशान तेजी से बढ़ रहा हो, उसका रंग बदल रहा हो, उसमें सूजन, दर्द, खुजली या रक्तस्राव हो रहा हो, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। आजकल लेजर थेरेपी और अन्य आधुनिक तकनीक से कुछ बर्थ मार्क को कम या हटाया जा सकता है, लेकिन केवल जरूरत पड़ने पर।
बर्थ मार्क एक सामान्य स्थिति है और इसे लेकर डरने की जरूरत नहीं है। प्रेग्नेंसी में फूल सूंघने या किसी भी बाहरी कारण से बर्थ मार्क नहीं बनते। माता-पिता को बच्चे की त्वचा पर नियमित नजर रखना चाहिए और किसी भी असामान्य बदलाव पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।