
नारी डेस्क : Bangladesh में खसरे का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब तक 118 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि देशभर में करीब 2000 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें सबसे अधिक संख्या बच्चों की है। अस्पतालों में मरीजों का इलाज जारी है, लेकिन तेजी से फैलते संक्रमण ने स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। ऐसे हालात में समय रहते बचाव और जागरूकता बेहद जरूरी हो गई है।
WHO और UNICEF के साथ मिलकर शुरू हुआ अभियान
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने World Health Organization, UNICEF और Gavi Vaccine Alliance के सहयोग से 18 हाई-रिस्क जिलों में खसरा-रूबेला टीकाकरण अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत 6 महीने से 5 साल तक के बच्चों को वैक्सीन दी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, अगले महीने से इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में लागू किया जाएगा।

टीकाकरण में कमी बनी बड़ी वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तेजी से फैल रहे संक्रमण के पीछे सबसे बड़ा कारण बच्चों का अधूरा या न होना टीकाकरण है। खासकर 9 महीने से कम उम्र के बच्चे अधिक जोखिम में हैं, क्योंकि वे नियमित टीकाकरण के दायरे में नहीं आते। आंकड़ों के मुताबिक, 15 मार्च के बाद से 7,500 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिनमें 900 से ज्यादा मामलों में खसरे की पुष्टि हुई है।
क्या है खसरा और कैसे फैलता है?
Measles (मीजल्स) एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है, जो Rubeola virus के कारण होती है। World Health Organization के अनुसार, यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के छींकने या खांसने से हवा में फैलता है और 2 घंटे तक सक्रिय रह सकता है।

खसरे के लक्षण
तेज बुखार और सूखी खांसी का होना।
बहती नाक और आंखों में जलन होना।
गालों पर सफेद धब्बे और शरीर पर लाल चकत्ते पड़ना।
कैसे करें बचाव?
बच्चों को समय पर MMR vaccine जरूर लगवाएं
संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखें
साफ-सफाई और हाइजीन का ध्यान रखें
भीड़-भाड़ वाली जगहों से बचें।
विशेषज्ञों के अनुसार, खसरे के प्रसार को रोकने के लिए करीब 95% आबादी का टीकाकरण जरूरी है।

खसरा एक गंभीर लेकिन पूरी तरह रोकी जा सकने वाली बीमारी है। समय पर टीकाकरण और जागरूकता ही इससे बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। बच्चों में कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।