
नारी डेस्क: उत्तराखंड में नैनीताल जिले में चैत्र नवरात्र के पावन पर्व पर गुरुवार को विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम में भक्तों का सैलाब उमड़ा। आज नवरात्र की शुरुआत के साथ ही देशभर के मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है, चारों ओर माता रानी के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया है। वहीं उत्तराखंड के नैनीताल और आसपास के क्षेत्रों में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। नैनीताल, रामनगर सहित हल्द्वानी के मंदिरों में सुबह से ही भक्तों का जमावड़ा लगा हुआ है।

कैंची धाम में लगी लंबी कतारें
हल्द्वानी के शीतला देवी मंदिर, नैनीताल के मां नयना देवी मंदिर और कैंची धाम में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। सुबह से ही श्रद्धालु व्रत रखकर घरों में पूजा-अर्चना करने के बाद मंदिरों की ओर रवाना हो रहे हैं, जिससे हर मंदिर परिसर भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंगा नजर आ रहा है। इस दौरान पूरे क्षेत्र में जय माता दी के जयकारे गूंज रहे हैं। नैनीताल और आसपास के प्रमुख मंदिरों - घोड़ाखाल, कैंची धाम, हनुमानगढ़ी, गुफा महादेव, स्नोव्यू मंदिर और सत्यनारायण मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
क्यों खास है कैंची धाम?
उत्तराखंड के कैंची धाम का नाम आज पूरे देश ही नहीं, विदेशों तक में प्रसिद्ध है। यह पवित्र स्थान महान संत नीम करौली बाबा से जुड़ा हुआ है, जिनके बारे में मान्यता है कि यहां आने वाले भक्तों की हर सच्ची मुराद पूरी होती है। कहा जाता है कि बाबा नीम करौली की कृपा से यहां आने वाले भक्त मानसिक शांति पाते हैं, जीवन की परेशानियों से राहत महसूस करते हैं और कई लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं यही कारण है कि हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

यहां हैं कंबल चढ़ाने की परंपरा
कैंची धाम में कंबल चढ़ाने की परंपरा के पीछे गहरी आस्था और भावना जुड़ी है। नीम करौली बाबा हमेशा गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा पर जोर देते थे। कंबल चढ़ाना उसी सेवा भावना का प्रतीक माना जाता है। कई भक्त मानते हैं कि मनोकामना मांगते समय कंबल चढ़ाने का संकल्प लें और इच्छा पूरी होने पर कंबल चढ़ाएं। इसे “श्रद्धा का वचन” माना जाता है। यहां का शांत वातावरण, सकारात्मक ऊर्जा और विश्वास लोगों को मानसिक ताकत देता है, जिससे वे अपनी समस्याओं से लड़ने में सक्षम होते हैं।