
नारी डेस्क: बसंत पंचमी हिंदू धर्म का एक बेहद खास पर्व है। यह दिन ज्ञान, विद्या और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है। मान्यता है कि इसी दिन देवी सरस्वती का अवतरण हुआ था। इस दिन पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की जाती है और घरों को रंग-बिरंगे फूलों, मिठाइयों और सजावट से सजाया जाता है। सबसे खास बात यह है कि इस दिन लोग पीले रंग के कपड़े पहनते हैं। कई लोगों के मन में यह सवाल होता है कि आखिर बसंत पंचमी पर पीले कपड़े पहनने की परंपरा क्यों है। इसके पीछे धार्मिक, प्राकृतिक और वैज्ञानिक कारण छिपे हैं। आइए विस्तार से जानते हैं।
धार्मिक महत्व
धार्मिक दृष्टि से पीला रंग बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पीले कपड़े पहनकर पूजा करने से मां सरस्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इससे व्यक्ति के जीवन में ज्ञान, बुद्धि और सकारात्मकता बढ़ती है। पीला रंग ज्ञान, बुद्धि, पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक है। मां सरस्वती को पीला रंग बहुत प्रिय माना गया है। इस दिन देवी को पीले वस्त्र पहनाए जाते हैं, पीले फूल अर्पित किए जाते हैं और कई जगह पीले रंग के प्रसाद का भोग लगाया जाता है।

प्राकृतिक कारण
बसंत पंचमी वसंत ऋतु के आगमन का भी संकेत है। सर्दियों के बाद मौसम सुहावना होने लगता है और प्रकृति नई ऊर्जा के साथ खिल उठती है। खेतों में सरसों के पीले फूल लहराने लगते हैं। पेड़ों पर नई कोपलें आती हैं और चारों ओर हरियाली के साथ पीले रंग की छटा दिखाई देती है। पीले कपड़े पहनना प्रकृति के इस सुंदर बदलाव और बसंत ऋतु के आगमन का उत्सव मनाने का एक तरीका माना जाता है।

वैज्ञानिक और मानसिक प्रभाव
रंगों का हमारे मन और शरीर पर गहरा असर पड़ता है। पीला रंग ऊर्जा, उत्साह और खुशी से जुड़ा होता है। यह रंग मन को खुश करता है और नकारात्मक विचारों को कम करता है। पीला रंग एकाग्रता बढ़ाने और रचनात्मक कार्यों में मदद करता है। पढ़ाई, कला या संगीत से जुड़े कार्यों के लिए यह रंग विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।

इस तरह बसंत पंचमी पर पीले कपड़े पहनने की परंपरा केवल एक रस्म नहीं है। इसके पीछे धार्मिक महत्व, प्रकृति से जुड़ाव और मानसिक सकारात्मकता छिपी हुई है। इस बसंत पंचमी आप भी पीले रंग के कपड़े पहनकर मां सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं और वसंत ऋतु का उत्सव आनंदपूर्वक मना सकते हैं।