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क्यों मनाई जाती है बसंत पंचमी, क्या है पीले रंग से इसका क्नैक्शन?

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 30 Jan, 2020 01:30 PM
क्यों मनाई जाती है बसंत पंचमी, क्या है पीले रंग से इसका क्नैक्शन?

भारत में बंसत पंचमी का त्यौहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन लोग स्नान कर पीले वस्त्र पहनकर सरस्वती माता की पूजा-अर्चना करते हैं और युवा पतंग उड़ाते हैं। मगर, क्या आप जानते हैं कि इस दिन पीले रंग का भोजन व कपड़े क्यों पहने जाते हैं और पंतगे उड़ाने का क्या कारण है?

चलिए आपको बताते हैं बंसत पंचमी से जुड़ी कुछ जरूरी व दिलचस्प बातें...

सबसे पहले जानते हैं पूजा का शुभ मुहूर्त

बसंत पंचमी - 29 जनवरी 2020
पूजा मुहूर्त - 10:45 से लेकर 12:35 बजे तक
पंचमी तिथि शुरू - 10:45 बजे से (29 जनवरी 2020)
पंचमी तिथि समाप्त - 13:18 बजे (30 जनवरी 2020) तक

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क्यों की जाती हैं सरस्वती माता की पूजा?

मान्यता है कि इस दिन माता सरस्वती का जन्म हुआ था इसलिए इस दिन माता सरस्वती की पूजा की जाती है। लोग सुबह स्नान करने के बाद पहले मां सरस्वती की पूजा करते हैं और उसके बाद पंतग उड़ाना शुरू कर देते हैं।

ऋतुओं का राजा है बंसत

बसंत पंचमी को श्री पंचमी और ज्ञान पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। दरअसल, भारत में पूरे साल को 6 ऋतूओं में बांटा गया है, इनमें बसंत ऋतु, ग्रीष्म ऋतु, वर्षा ऋतु, शरद ऋतु, हेमंत ऋतु और शिशिर ऋतु शामिल है, जिसमें से बसंत को सभी ऋतुओं का राजा कहा जाता है।

क्यों पहने जाते हैं पीले कपड़ें?

पीला रंग माता सरस्वती का प्रिय रंग है और हिंदु धर्म में भी इसे बहुत शुभ माना जाता है। यह शुद्ध और सात्विक प्रवृत्ति का प्रतीक है इसलिए बंसच पंचमी के दिन पीला भोजन बनाने से लेकर पीले रंग के कपड़े पहनते हैं।

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क्यों उड़ाई जाती हैं पंतग?

साथ ही बसंत पंचमी के दिन पूजा के साथ 'पतंग महोत्सव' का लुत्फ भी उठाया जाता है। इस दिन से नई ऋतु का आगमन भी होता है और फसलों पर हरे व पीले फूल भी खिलते हैं इसलिए लोग इस खुशी में पंतग बाजी भी करते हैं। पतंग उड़ाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। कभी रीति-रिवाज, परंपरा और त्योहार के रूप में उड़ाए जाने वाली पतंग आज मनोरंजन बन चुकी है। लड़के सुबह से ही पतंगें उड़ानें में लग जाते हैं।

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किसने बनाई थी पहली पंतग?

माना जाता है कि पतंग का आविष्कार ईसा पूर्व तीसरी सदी में चीन में हुआ था। दुनिया की पहली पतंग एक चीनी दार्शनिक मो दी ने बनाई थी। उस काल में पतंग टिशू पेपर और बांस की बनी होती थी। चीन के बाद पतंगों का फैलाव जापान, कोरिया, थाईलैंड, बर्मा, भारत, अरब और उत्तरी अफ्रीका तक हुआ।

क्यों खास है बसंत पंचमी?

साल के कुछ विशेष शुभ काल में से एक होने के कारण इसे "अबूझ मुहूर्त" भी कहा जाता है। इसमे विवाह, घर बनाना और अन्य शुभ कार्य किए जा सकते हैं।

इन बातों का रखें खास ख्याल

. महिलाओं को चाहिए कि सुबह जल्दी उठकर मां सरस्वती का 5 से 10 मिनट ध्यान जरुर करें।
. बड़े बुर्जों का आशीर्वाद लें।
. पीले वस्त्र पहनें, पीला भोजन करें और पंतग जरूर उड़ाएं।
. मंदिर की अच्छे से साफ-साफई की होनी चाहिए।
. माता सरस्वती को पीले फूल व भोजन अर्पित करें।
. गरीब व जरूरतमंदों को भोजन व दान-पुण्य करें।
. महिलाएं दिन के समय ना सोएं।
. घर में कलह-कलेश ना करें।
. बाल धोने और उन्हें काटने की गलती भी न करें।
. पेड़-पौधों की कांट-छांट भी नहीं करनी चाहिए। 
. नॉनवेज, शराब आदि का सेवन भी ना करें।

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