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घर के मंदिर में जल रखना जरूरी, वास्तुशास्त्र में बताए गए कई फायदे

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  • Updated: 01 May, 2023 03:38 PM
घर के मंदिर में जल रखना जरूरी, वास्तुशास्त्र में बताए गए कई फायदे

 घर का मंदिर सबसे पवित्र स्थान होता है, जहां से पूरे घर में पॉजिटिव एनर्जी आती है। इस जगह का जितना साफ होना जरूरी है, उतना ही ये भी जरूरी है कि पूजा घर में कुछ जरूरी समान हों, जो ना सिर्फ आपके घर में पॉजिटिव एनर्जी लाने में सक्षम होते हैं बल्कि आपके लिए शुभ भी होते हैं। धर्म शास्त्रों में ऐसी कई बातें लिखी गई हैं जिनका सदियों से पालन किया जा रहा है इन्हीं में से एक है तांबे या अन्य धातु के बर्तन में रखा जल। इस जल को नियमित रूप से बदलते रहें और घर के कोने-कोने में छिड़कें। घर में जल छिड़कने से सकारात्मक ऊर्जा आती है। तो चलिए आज आपको बताते हैं इससे जुड़े कुछ वास्तु नियम...
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जल का छिड़काव किए बिना अधूरी होती है पूजा

पूजा कक्ष में रखा गया जल नकारात्मकता को सोख लेता है। तांबे को जल रखने की सबसे पवित्र धातु माना जाता है। इसलिए इसमें जल रखना सबसे शुभ होता है। तांबे के बर्तन में पानी भरकर रखना घर की तरक्की के लिए शुभ माना जाता है। पूजा के बाद जब भी आरती समाप्त होती है तो जल से ही आरती की जाती है। ऐसा करने का मुख्य कारण यह है कि वरुण देव के रूप में जल की पूजा की जाती है जोकि संसार की हर वस्तु की रक्षा करते हैं। बताया गया है कि आरती के समय जल का छिड़काव किए बिना पूजा अधूरी मानी जाती है, इसलिए पूजा घर में जल रखा जाता है। जिससे पूजा अधूरी छोड़कर आपको जाना न पड़े और आप उसी जल का इस्तेमाल कर सकें जो पूजा घर में रखा हुआ है।

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जल में डाले तुलसी की पत्तियां

बताया गया है कि पूजा घर में रखे जल में तुलसी की कुछ पत्तियां डालकर रखती हैं तो यह जल और ज्यादा पवित्र हो जाता है। यह जल किसी पवित्र नदी का जल भी हो सकता है जो पूजा स्थल को शुद्ध रख सकता है। इसके अलावा भक्त द्वारा ईश्वर के दिव्य रूप के पैर और हाथ धोने के लिए उनके ऊपर जल चढ़ाया जाता है। जल से ईश्वर की मूर्तियों को स्नान कराया जाता है और उनका चेहरा धोने के लिए उन पर पानी भी चढ़ाया जाता है। ये उसी प्रकार से होता है जैसे किसी यात्रा के बाद घर में आए मेहमान को जल से पैरों को धोने की सलाह दी जाती है।

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