
नारी डेस्क: अमेरिका के जॉर्जिया राज्य में 31 वर्षीय महिला एलेक्सिया मूर पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि उन्होंने लगभग छह महीने की गर्भावस्था के दौरान गर्भपात की दवाओं का सेवन किया, जिससे बच्ची जिंदा जन्मी लेकिन जन्म के एक घंटे बाद उसकी मौत हो गई। यह मामला जॉर्जिया के सख्त गर्भपात कानूनों के तहत सामने आने वाला पहला गंभीर मामला है।
घटना कैसे हुई
मामला पिछले साल दिसंबर का है। एलेक्सिया मूर लगभग छह महीने की गर्भवती थीं। उन्होंने गर्भपात के लिए ‘मिसोप्रोस्टोल’ (Misoprostol) नाम की दवा ली और दर्द कम करने के लिए ‘ऑक्सीकोडोन’ (Oxycodone) की अधिक मात्रा खा ली। दवाओं की ज्यादा खुराक लेने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में एलेक्सिया ने बच्ची को जन्म दिया। डॉक्टरों के मुताबिक बच्ची जिंदा थी, लेकिन जन्म के एक घंटे बाद ही उसकी मौत हो गई।
पुलिस के आरोप
जॉर्जिया पुलिस का कहना है कि बच्ची जिंदा जन्मी थी और एलेक्सिया द्वारा लिए गए कदमों की वजह से उसकी जान गई। रिपोर्ट्स में बताया गया कि बच्ची के खून में ऑक्सीकोडोन के अंश भी पाए गए। जॉर्जिया का कानून कहता है कि अगर गर्भ में पल रहे बच्चे का हृदय धड़कने लगता है (आमतौर पर 6 हफ़्ते के बाद), तो गर्भपात करना गैर-कानूनी है। इसलिए पुलिस ने एलेक्सिया मूर पर हत्या का आरोप लगाया है।
विवाद और विरोध
इस मामले के बाद मानवाधिकार कार्यकर्ता और गर्भपात के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन विरोध में आ गए हैं। उनका कहना है कि गर्भपात कराने वाली महिलाओं को अपराधी बनाना दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे महिलाओं के स्वास्थ्य और अधिकारों पर नकारात्मक असर पड़ता है। एलेक्सिया मूर को कैमडेन काउंटी जेल में रखा गया है और उनका ट्रायल जल्द शुरू होने वाला है।
मामला अमेरिका में गर्भपात कानून पर बहस का केंद्र
इस घटना ने अमेरिका में गर्भपात कानूनों पर फिर से बहस छेड़ दी है। जॉर्जिया जैसे राज्यों में सख्त कानून बनने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि महिलाओं के अधिकार और स्वास्थ्य के मुद्दे पर समाज में गंभीर मतभेद हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में कानून और स्वास्थ्य अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि महिलाओं के जीवन और स्वास्थ्य को खतरा न हो।