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Nari

40 घंटे के लिए हुई इस इंसान की मौत, दो दिन बंंद रहने के बाद फिर चल पड़ी धड़कनें

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 29 Apr, 2026 02:06 PM
40 घंटे के लिए हुई इस इंसान की मौत, दो दिन बंंद रहने के बाद फिर चल पड़ी धड़कनें

नारी डेस्क: ज़रा सोचिए कि आपका दिल धड़कना बंद कर दे। कुछ सेकंड के लिए नहीं कुछ मिनटों के लिए भी नहीं बल्कि 40 घंटे से भी ज़्यादा समय के लिए। दिल की अपनी कोई धड़कन नहीं कुछ भी नहीं। बस मशीनें आपको ज़िंदा रखे हुए हैं। पूर्वी चीन में 40 साल के एक व्यक्ति के साथ ठीक यही हुआ और उन तमाम मुश्किलों के बावजूद, जिन्हें पार करना नामुमकिन सा लगता था उसका दिल फिर से धड़कने लगा। अब इस घटना के बारे में जानकर हर कोई हैरान और सवाल कर रहा है कि आखिर ये चमत्कार कैसे हुआ। 
 

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दिल के साथ फेफड़ों ने भी काम करना किया बंद

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक एक व्यक्ति सीने में जकड़न और सांस लेने में तकलीफ़ की शिकायत लेकर 'झेजियांग यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ़ मेडिसिन' के 'सेकंड अफ़िलिएटेड हॉस्पिटल' में आया था। लेकिन फिर हालात अचानक बहुत ज़्यादा बिगड़ गए। उसे अचानक कार्डियक और रेस्पिरेटरी अरेस्ट आ गया। उसका दिल धड़कना बंद हो गया। उसके फेफड़ों ने काम करना बंद कर दिया। शरीर की वो सामान्य लय, जो आपको जिंदा रखती है, बस वही  थम गई। डॉक्टरों ने उसके दिल को फिर से चालू करने के लिए अपनी जानकारी का हर तरीका आज़मा लिया लेकिन कुछ भी काम नहीं आया। वे बिजली के झटके, जो आम तौर पर दिल की धड़कन को वापस लय में ले आते हैं, इस बार बेअसर रहे। उसका दिल कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहा था। लेकिन इन डॉक्टरों ने हार नहीं मानी। उन्होंने उसे ECMO (एक्स्ट्राकॉर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन) पर डाल दिया।


 दो दिनों तक मशीनों के सहारे जिंदा रहा मरीज

यह असल में आधुनिक चिकित्सा का सबसे उन्नत जीवन रक्षक प्रणाली है। ज़रा सोचिए, अगर आपके दिल और फेफड़ों की जगह कोई मशीन ले ले तो कैसा होगा? ECMO ठीक यही काम करता है। यह आपके शरीर से खून बाहर निकालता है, उसमें से कार्बन डाइऑक्साइड हटाता है, उसमें ऑक्सीजन मिलाता है और फिर उसे वापस शरीर में पंप कर देता है। उन्होंने उसे एक इंट्रा-एओर्टिक बैलून पंप से भी जोड़ा यह एक और ऐसा उपकरण है जिसे रक्त प्रवाह को बेहतर बनाने और कमज़ोर पड़ रहे दिल पर से दबाव कम करने के लिए बनाया गया है। लगभग दो दिनों तक, वह इसान मशीनों से जुड़ा हुआ एक शरीर ही था। दिल की कोई अपनी धड़कन नहीं। मॉनिटर पर दिखने वाले अंकों के अलावा जीवन का कोई और संकेत नहीं और फिर वह चमत्कार हुआ।
 

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डाॅक्टरों की मेहनत और किस्मत ने दिया साथ

 40 घंटे से भी ज़्यादा समय तक मशीनी सहारे पर रहने के बाद, उसके दिल की कार्यप्रणाली फिर से काम करने लगी। उसके दिल की धड़कन सामान्य हो गई। आपातकालीन चिकित्सा के लिए अस्पताल लाए जाने के लगभग तीन हफ़्ते बाद, वह अपने पैरों पर चलकर उस अस्पताल से बाहर निकला। डॉक्टरों ने उसे 'फुलमिनेंट मायोकार्डिटिस' होने का पता लगाया यह दिल की मांसपेशियों में होने वाली एक दुर्लभ और गंभीर सूजन है, जो कुछ ही घंटों में आपके दिल को पूरी तरह से खराब कर सकती है। यह स्थिति इतनी तेज़ी से हार्ट फेलियर, दिल की धड़कन में खतरनाक अनियमितताएँं (arrhythmias), और कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकती है कि अक्सर इसके इलाज के लिए कुछ भी करने का समय ही नहीं मिल पाता। लेकिन इस मामले में, तुरंत की गई चिकित्सा, उन्नत तकनीक, और शायद थोड़ी-सी किस्मत ने मिलकर उसकी जान बचा ली।
 

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