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द्वापर युग का विवाह स्थल बना बेस्ट Wedding Destination ,श्रीकृष्ण के पोते ने की थी यहां शादी

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 19 Apr, 2024 03:46 PM
द्वापर युग का विवाह स्थल बना बेस्ट  Wedding Destination ,श्रीकृष्ण के पोते ने की थी यहां शादी

उत्तराखंड स्थित श्री त्रियुगी नारायण मंदिर को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में मिली प्रसिद्वि के बाद, अब उषा-अनिरूद्ध विवाह स्थली श्री ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ भी वेडिंग डेस्टिनेशन बन गया है। तभी तो  दिल्ली के एक जोड़े ने अपनी शादी के लिए  उषा-अनिरूद्ध विवाह मंडप श्री ओंकारेश्वर मंदिर को चुना। बताया जा रहा है कि लोग इसके बारे में जानकारी जुटाने में जुटे हैं, वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में इस जगह को बेहद पसंद किया जा रहा है। 

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रोहिणी, दिल्ली निवासी लखन चंदेला(44) तथा संगीता सिंह( 41) वीरवार को उषा- अनिरूद्ध विवाह मंडप में सात फेरे लेकर शादी के बंधन में बंधे। विवाह संबंधी रस्मों, पूजा- पाठ का कार्य मंदिर समिति के आचार्यगणों द्वारा संपन्न करवाया गया। स्थानीय महिलाओं तथा महिला मंगल दल ने मंगल गान का आयोजन कर नवविवाहित जोड़े को शुभकामनाएं दी गई। साथ ही स्थानीय बाजीगरों ने ढ़ोल- दमाऊं की थाप से मंगल जागरों का गायन किया।

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नव दंपत्ति के परिजनों ने बताया कि वे लोग पिछले साल केदारनाथ यात्रा पर आये थे। तब वे श्री ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ भी दर्शन को आये। उन्होंने भगवान कृष्ण के पोते श्री अनिरूद्ध तथा बाणासुर पुत्री उषा के विवाह मंडप एवं श्री ओंकारेश्वर मंदिर के महात्म्य को सुना। तत्पश्चात, इसी विवाह मंडप में विवाह का संकल्प किया। इस हेतु उन्होंने श्री बदरीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति से संपर्क किया। 

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विवाह कार्यक्रम हेतु मुख्य कार्याधिकारी योगेंद्र सिंह तथा कार्याधिकारी आरसी तिवारी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी यदुवीर पुष्पवान ने उन्हे यथोचित सहयोग प्रदान किया। जिसके लिए उन्होंने मंदिर समिति की प्रशंसा की। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराखंड में वेडिंग डेस्टिनेशन को लेकर दिए गए सुझाव के बाद शिव पार्वती के विवाह स्थल त्रियुगीनारायण की तरह दूसरे वेडिंग डेस्टिनेशन पर भी फोकस किया जाने लगा है।

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ओंकारेश्वर मंदिर की बात करें मो उखीमठ में स्थित ये मंदिर शिव भक्त बाणासुर की बेटी उषा और भगवान कृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध का विवाह स्थल है। जिस मंडप में यह विवाह हुआ था वह मंडप आज भी यहां मौजूद है। उषा की शादी अनिरुद्ध से होने के बाद उस जगह को 'उषामठ' कहा जाने लगा जो बाद में " उखीमठ" कहलाया। इस पौराणिक स्थल पर विवाह उत्तराखंडी रीति रिवाज के अनुसार कराए जाते हैं। 

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स्थानीय महिलाओं को मंगल गीत गाने, मंगल स्थान करने और पहाड़ के पारंपरिक व्यंजन बनाने की ट्रेनिंग दी जाती है। शादी के लिए मंदिर समिति के पास रजिस्ट्रेशन कराना होता है। अगर आप भी अपनी या किसी खास की शादी के लिए  वेडिंग डेस्टिनेशन की तलाश में हैं तो प्रेम का प्रतीक माने जाने वाले इस स्थान पर भरोसा कर सकते हैं। कहा जाता है कि यहां आकर एक अलग ही अनुभव होता है। 

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