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महिलाओं के बांझ होने की एक वजह है रसौली, शुरुआती संकेत पहचानें और जानें देसी उपचार

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 02 Jun, 2019 03:15 PM
महिलाओं के बांझ होने की एक वजह है रसौली, शुरुआती संकेत पहचानें और जानें देसी उपचार

गलत खान-पान और भागदौड़ भरी जिंदगी के कारण आजकल 10 में से 7 महिलाएं किसी न किसी हैल्थ प्रॉब्लम की शिकार हैं। इन्हीं में से एक हैं गर्भाश्य में रसौली यानि बच्चेदानी में गांठ, जिसे फाइब्रॉइड भी कहते हैं। गर्भाशय से जुड़ी किसी भी तरह की बीमारी के कारण महिलाओं को गर्भाधरण करने में परेशानी होती है। साथ ही यह अनियमित पीरियड्स का कारण भी बन सकता है। ऐसे में बहुत जरूरी है कि महिलाएं इसके लक्षणों को पहचानकर समय रहते इलाज करें।

 

क्या है गर्भाश्य में रसौली?

इस समस्या में महिला के गर्भाशय में कोई मांसपेशी असामान्य रूप से ज्यादा विकसित हो जाती है और धीरे-धीरे गांठ का रूप ले लेती है, जोकि एक तरह का ट्यूमर है। महिला के गर्भाशय में पाई जाने वाली ये गांठ मटर के दाने से लेकर क्रिकेट बॉल जितनी बड़ी हो सकती है। इसकी वजन से महिलाओं को मां बनने में दिक्कत होती है।

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किन महिलाओं को होती है अधिक समस्या

शोध के अनुसार लगभग 40 प्रतिशत महिलाएं रसौली का शिकार होती है, जिसका सबसे बड़ा कारण है महिलाओं को इसकी सही जानकारी ना होना। वैसे तो अक्सर यह समस्या 30 से 50 की उम्र में देखने को मिलती है लेकिन गलत खान-पान के कारण यह समस्या इससे कम उम्र में हो जाती है। मोटापे से ग्रस्त महिलाओं का एस्ट्रोजन हार्मोन स्तर ज्यादा होने के कारण उन्हें इसका खतरा सबसे अधिक होता है।

रसौली से क्यों होती है मां बनने में दिक्‍कत

गर्भाशय में होने वाली गांठ के कारण अंडाणु और शुक्राणु का न‍िषेचन नहीं होने के कारण बांझपन की समस्‍या होती है। आनुवंशिकता, मोटापा, शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा का बढ़ना और लंबे समय तक संतान न होना इसके प्रमुख कारकों में से एक हैं।

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रसौली के लक्षण

पीरियड्स के दौरान भारी ब्लीडिंग
अनियमित पीरियड्स
पेट के नीचे के हिस्से में दर्द
प्राइवेट पार्ट से खून आना
एनीमिया और कमजोरी महसूस होना
प्राइवेट पार्ट से बदबूदार डिस्चार्ज
पेशाब रुक-रुककर आना
संबंध बनाते वक्‍त तेज दर्द
कब्ज व पेट में सूजन
प्राइवेट पार्ट से खून या बदबूदार डिस्चार्ज आना

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गर्भाशय की गांठ का इलाज

पहले ओपन सर्जरी द्वारा इसका इलाज किया जाता था, जिससे स्वस्थ होने में लगभग 1 महीने से अधिक का समय लगता था। मगर अब लेप्रोस्कोपी की नई तकनीक के जरिए इस बीमारी इलाज किया जाता है। इस तरीके से अधिक तकलीफ नहीं होती, खून भी ज्यादा नहीं निकलता और सर्जरी के 24 घंटे बाद महिला घर जा सकती है।

घरेलू तरीके भी है मददगार
हल्दी

एंटीबॉयोटिक गुणों से भरपूर हल्दी का सेवन शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकाल देता है। यह फायब्रॉइड की ग्रोथ को रोक कर कैंसर का खतरा कम करता है।

बरडॉक रूट

एंटी-इंफ्लेमेंटरी गुण से भरपूर यह जड़ी-बूटी एस्‍ट्रोजन को डिटॉक्‍स कर गर्भाशय फाइब्रॉइड को कम करने में मदद करती है।

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सिंहपर्णी

2-3 कप पानी में 3 चम्मच सिंहपर्णी की जड़ का पाऊडर डालकर उबाल लें। फिर इसे हल्‍का ठंडा करने के बाद पीएं। इसे कम से कम 3 महीने तक दिन में 3 बार लें।

लहसुन

रसौली की समस्या होने पर खाली पेट रोज 1 लहसुन का सेवन करें। लगातार 2 महीने तक इसका सेवन इस समस्या को जड़ से खत्म कर देता है।

चेस्‍टबेरी

चेस्‍टबेरी हर्ब से बने मिश्रण की 25-30 बूंदों को दिन में दो से चार बार लेने से एस्ट्रोजन का स्तर और सूजन कम होती है, जिससे रसौली की समस्या ठीक हो जाती है।

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