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हनुमान जयंती 2026 व्रत कथा:  हनुमानजी का जन्म कैसे हुआ,पढ़ें हनुमान जयंती की कथा

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 02 Apr, 2026 04:28 PM
हनुमान जयंती 2026 व्रत कथा:  हनुमानजी का जन्म कैसे हुआ,पढ़ें हनुमान जयंती की कथा

नारी डेस्क: हनुमान जयंती, रामनवमी के कुछ दिनों बाद, चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाई जाती है। इस दिन भगवान हनुमान का जन्म हुआ था। उन्हें रुद्र अवतार, पवनपुत्र, संकटमोचन और बजरंगबली के नामों से भी जाना जाता है। हनुमान जी के जन्म से लेकर उनके नाम और शक्तियों तक, हर चीज़ में एक अद्भुत और दिव्य कथा जुड़ी हुई है।

हनुमान जी के जन्म की पौराणिक कथा

हनुमान जी को भगवान शिव के 11वें रुद्र अवतार और प्रभु श्री राम के परम भक्त के रूप में जाना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, त्रेता युग में भगवान राम के कार्यों में मदद करने के लिए शिवजी ने हनुमानजी के रूप में अवतार लिया। भगवान हनुमान का जन्म माता अंजना और वानर राज केसरी के घर हुआ। कहा जाता है कि माता अंजना और केसरी संतान सुख से वंचित थे। उन्होंने इस पीड़ा को मतंग ऋषि के सामने रखा। ऋषि ने माता अंजना को दक्षिण दिशा में नारायण पर्वत पर बारह वर्ष तक तपस्या करने की सलाह दी। इस तपस्या के दौरान वायु देव ने माता अंजना के कान में प्रवेश कर उन्हें हनुमान जी के रूप में महाबली पुत्र का वरदान दिया। इसी वजह से हनुमान जी को मारुति यानी पवनपुत्र कहा जाता है।

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माता अंजना को भगवान शिव का वरदान

एक अन्य कथा के अनुसार, माता अंजना ने ऋषि दुर्वासा के श्राप से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें वरदान दिया कि उनके गर्भ से दिव्य पुत्र जन्म लेगा। इसी समय अयोध्या में महाराज दशरथ पुत्र कामेष्टि यज्ञ कर रहे थे। अग्नि देव ने खीर का पात्र प्रकट किया, जिसे तीनों रानियों को खिलाने के लिए कहा गया। इस दौरान एक पक्षी खीर की थोड़ी मात्रा लेकर अंजना के हाथ में गिरा देता है। माता अंजना ने इसे भगवान शिव का प्रसाद समझकर ग्रहण कर लिया। इस प्रकार हनुमान जी का जन्म हुआ।

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कैसे मारुति बने हनुमान

हनुमान जी जन्म से ही अत्यंत बलशाली, बुद्धिमान और तेजस्वी थे। उनके जन्म के बाद एक घटना घटी, जिसने उन्हें हनुमान नाम दिया। कहानी के अनुसार, बाल हनुमान ने भूख लगने पर सूर्य को फल समझकर निगलने की कोशिश की। इस पर इंद्र देव ने वज्र से हमला किया, जिससे हनुमान जी की ठुड्डी टूट गई। इस घटना के बाद उनका नाम “हनुमान” पड़ा (हन = टूटना + मान = ठुड्डी)। देवताओं ने उन्हें अमरता और दिव्य शक्तियों का वरदान भी दिया।

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हनुमान जयंती के दिन भक्त हनुमान जी की पूजा कर उनके बल, बुद्धि और भक्ति का स्मरण करते हैं। यह दिन उनके अनुयायियों के लिए विश्वास, शक्ति और संकटमोचन होने का प्रतीक है।  

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