
नारी डेस्क: राजस्थान के सीकर जिले से इस बार 12वीं साइंस रिजल्ट की सफलता की एक प्रेरक कहानी सामने आई है। यहां तीन छात्राओं दिव्या भादू, निकिता जांगिड़ और ऋषिता तूनवाल ने संयुक्त रूप से 99.80 प्रतिशत अंक हासिल कर स्टेट टॉपर बनकर नया रिकॉर्ड बनाया। इन तीनों की मेहनत और दोस्ती ने उन्हें यह उपलब्धि दिलाई। खास बात यह रही कि तीनों के सिर्फ 1-1 नंबर हिंदी में कटे, अन्यथा परफेक्ट स्कोर बन सकता था।
10वीं में कम नंबर ने दिया नई चुनौती
दिव्या भादू, जो मूल रूप से बाड़मेर की चौहाटन की निवासी हैं, 10वीं में कम नंबर आने के बाद निराश हुई थीं। लेकिन इस असफलता को उन्होंने चुनौती में बदल दिया। बाड़मेर से सीकर आकर एक निजी स्कूल में पढ़ाई की और हॉस्टल में रहकर रोजाना 4-5 घंटे सेल्फ स्टडी की। उनका मानना है कि 11वीं में अगर गंभीरता नहीं दिखाई जाए तो 12वीं में सफलता मुश्किल होती। अब उनका लक्ष्य आईएएस बनना है।

मोबाइल से दूरी और पढ़ाई में दोस्ती बनी सफलता का मंत्र
निकिता जांगिड़ और ऋषिता तूनवाल दोनों ही सीकर के ब्राइट स्कूल की छात्राएं हैं और पक्की सहेलियां भी हैं। निकिता बताती हैं कि उन्होंने हर दिन 14-15 घंटे पढ़ाई की और मोबाइल का इस्तेमाल केवल डाउट्स क्लियर करने के लिए किया। उनका कहना है कि डिसिप्लिन और कंसिस्टेंसी ही सफलता की कुंजी है।
ऋषिता तूनवाल ने बताया कि दोस्ती ने उन्हें हमेशा मोटिवेट किया। दोनों सहेलियों ने एक-दूसरे के साथ बैठकर पढ़ाई की, डाउट्स डिस्कस किए और एक-दूसरे को प्रेरित किया। दोनों का मानना है कि अगर सही दोस्त और सही दिशा मिले तो टॉपर बनना आसान हो जाता है।
साथ पढ़ाई, साथ मेहनत और सपनों की ऊंचाई
दोनों सहेलियों ने रोजाना स्कूल के अलावा एक्स्ट्रा क्लास ली और घर आकर देर रात तक पढ़ाई जारी रखी। उनका फॉर्मूला था – मेहनत + मित्रता + समर्पण। निकिता और ऋषिता दोनों के माता-पिता ने उन्हें लगातार प्रोत्साहित किया। यही प्रेरणा उन्हें राजस्थान के टॉपर्स में शामिल करने में मददगार साबित हुई।

अब लक्ष्य आईएएस
तीनों टॉपर्स का सपना अब आईएएस बनना है। दिव्या, निकिता और ऋषिता की कहानी बताती है कि कड़ी मेहनत, सटीक टाइम टेबल, सही दोस्त और परिवार का समर्थन किसी भी छात्र को उच्च सफलता दिला सकता है। यह सफलता न केवल सीकर बल्कि पूरे राजस्थान के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है।