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रक्षाबंधन: भाई-बहन के स्नेह और प्यार का प्रतीक

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 15 Aug, 2019 11:22 AM
रक्षाबंधन: भाई-बहन के स्नेह और प्यार का प्रतीक

भगवान की तरफ से दिया गया अनमोल तोहफा है भाई-बहन का रिश्ता... लाड़-प्यार, खट्टी-मीठी नोक-झोंक से लेकर रूठने मनाने की चाशनी में लिपटा हुआ यह सतरंगी रिश्ता अपने आप में कितनी ही उजली यादें ताउम्र समेटता चला जाता है। कभी बचपन की शरारत, कभी बातों में बड़प्पन, कभी बड़े भाई का पिता की कमी को पूरा करने का प्रयास तो कभी बड़ी बहन का मां की जगह ले लेना, कितनी ही बातें हैं, जो भाई बहन के दिल में छुपे प्यार, स्नेह और दुलार के भावों को दर्शाती हैं। यही कारण है कि भाई-बहन राखी के त्यौहार को शिद्दत से मनाते है।

 

रिश्तों का बन जाते हैं पर्याय

देखा जाए तो भाई-बहन का रिश्ता ही ऐसा है, जो स्वयं में अनेक रिश्तों को समेटे हुए चलता है। कभी दोनों दोस्तों की तरह अपने हर राज को एक-दूसरे से सांझा करते हैं तो मां और पिता से अपनी कोई फरमाइश पूरी करवाने से लेकर डांट से बचाने तक में किसी हमदर्द की तरह एक साथ खड़े हो जाते हैं, किसी क्षेत्र में नाम कराना हो तो भी भाई बहन की जोड़ी सिपर-डुपर हिट ही मानी जाती है।

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टीचर की तरह रहते हैं साथ

वे किसी शिक्षक की तरह एक दूसरे को सही राह दिखाते और समझते भी हैं और माता-पिता में से किसी एक के ना होने पर उनकी जगह खड़े हो जाते हैं।

एक-दूसरे पर होता है भरोसा

एक बहन को जितनी भरोसा अपने भाई पर होता है, उतना किसी पर नहीं होता। उसी तरह भाई को अपनी बहन से जितनी स्नेह होता है उतना दुनिया में किसी और से हो ही नहीं सकता।

झगड़े भी कम नहीं

जितना भाई-बहन एक दूसरे से झगड़ते हैं उतना ही वे न किसी और रिश्ते व ना ही किसी दोस्त से लड़ते हैं। दोनों के झगड़े में सबसे ज्यादा मुश्किल में माता-पिता ही फंसते हैं कि आखिर वेकिसका साथ दें। दोनों ही उन्हें प्यारे हैं और दोनों ही अपनी तरफ का समर्थन चाहते हैं। फिर भी यह तो तय है कि बड़े से बड़े झगड़े के बाद दोनों एक हो जाते हैं और दिलों में कड़वाहट की जगह स्नेह की धारा बहने लगती है।

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बढ़ता है प्यार

ऐसी ही नोकृ-झोंक, तकरार और शरारतों से ही तो उनका प्यार बढ़ता है और यह रिश्ता संवरता है। सालों बाद भी यादों के पिटारे से कितनी ही बातें निकलकर उन्हें गुदगुदाती, हंसाती और रूलाती भी हैं। दोनों में से कोई नहीं चाहता कि उनके स्नेगहिल रिश्ते की यादें कभी धुंधली पड़ें, तभी तो आज भी मां की जुबान पर मामा से जुड़ी कितनी ही यादों के किस्से सुनने को मिल जाते हैं और नानी भी अक्सर रक्षा बंधन पर अपने भाई की बातें सुनाने बैठ जाती हैं।

बदलते समय का असर

आज की तेज रफ्तार जिंदगी का असर इस स्नेहिल रिश्ते पर भी देखने को मिलने लगा है। आज मीलों लंबे रास्ते पलभर में तय करने आसान है लेकिन दिलों के फासलों को मिटाना उतना आसान नहीं रह गया है। फिर भी इस रिश्ते में वह कशिश है कि मुश्किल पलों में भाई-बहन एक-दूसरे के पास पहुंचने को लालयित हो उठते हैं।

रिश्ते कानूनी एक्ट नहीं

भले ही आज कानून की दखलअंदाजी ने बहन को भी पिता की संपत्ति का वारिस बना दिया है , जिससे कहीं-कहीं दोनों के रिश्ते में खटास भी देखने को मिलती है। भाई बहन के प्रति मन में ईर्ष्या का भाव रखने लगा है तथा उसे कुछ नहीं देना चाहता। मगर कानून रिश्ते कानूनी एक्ट नहीं होते, जो तर्क या दलीलों का हस्तक्षेप हो। रिश्ते तो भावनाओं का संगम होते हैं जो एक-दूसरे को सहारा देते हैं। ऐसे में जहां भाई को समझना चाहिए कि माता-पिता की हर चीज पर बहन का भी बराबर का हक है वहीं भाई को भी नर्मी से पेश आना चाहिए।

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