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बदरीनाथ-केदारनाथ समेत 45 मंदिरों में इन लोगों की NO ENTRY, जानें पूरा मामला

  • Edited By Monika,
  • Updated: 26 Jan, 2026 05:05 PM
बदरीनाथ-केदारनाथ समेत 45 मंदिरों में इन लोगों की NO ENTRY, जानें पूरा मामला

नारी डेस्क : उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने एक बड़ा फैसला लिया है। समिति के अध्यक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता हेमंत द्विवेदी ने घोषणा की है कि बदरीनाथ धाम, केदारनाथ धाम सहित समिति के अधीन आने वाले सभी 45 मंदिरों में अब गैर-हिंदुओं का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा।

परंपराओं की रक्षा के लिए सख्त निर्णय

हेमंत द्विवेदी ने कहा कि केदार खंड से लेकर मानस खंड तक स्थित पवित्र मंदिरों में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। हालांकि, बीते कुछ वर्षों में इस परंपरा की अनदेखी हुई, जिससे मंदिरों की धार्मिक मर्यादा प्रभावित हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि देवभूमि उत्तराखंड की पवित्रता और आस्था की रक्षा करना समिति की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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बोर्ड बैठक में आएगा औपचारिक प्रस्ताव

BKTC अध्यक्ष के अनुसार, इस निर्णय को कानूनी और प्रशासनिक रूप देने के लिए आगामी बोर्ड बैठक में औपचारिक प्रस्ताव लाया जाएगा। प्रस्ताव पारित होने के बाद नियमों को सख्ती से लागू किया जाएगा, ताकि मंदिर परिसरों में धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जा सके।

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धामी सरकार की कार्रवाई को बताया सराहनीय

हेमंत द्विवेदी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेशभर में सरकारी भूमि से अवैध मजारों को हटाने की कार्रवाई की भी सराहना की। उन्होंने इसे उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और कानून-व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में अहम कदम बताया।

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UCC और अन्य फैसलों से बढ़ा जनविश्वास

द्विवेदी ने कहा कि समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने और अंकिता भंडारी मामले में CBI जांच जैसे फैसलों से जनता का राज्य सरकार पर भरोसा और मजबूत हुआ है। उनका मानना है कि ऐसे निर्णयों से देवभूमि की पहचान और सामाजिक संतुलन दोनों को मजबूती मिलती है।

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प्रस्ताव के औपचारिक रूप से पारित होने के बाद मंदिरों में प्रवेश से जुड़े नियमों को स्पष्ट दिशा-निर्देशों के साथ लागू किया जाएगा। BKTC का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य किसी वर्ग विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं और आस्थाओं की रक्षा करना है।

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